फिर गन्ना किसानों के साथ छलावा
मुजफ्फरनगर। प्रदेश में भाजपा की योगी सरकार ने गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी नहीं कर किसानों के साथ नाइंसाफी किया है। किसानों का कहना है कि तीन साल में गन्ने की उपज की लागत बेतहाशा बढ़ गई हैं। मजदूरी, जुताई, डीएपी, कीटनाशक, बिजली के दाम दोगुने हो गए हैं। लागत बढ़ने के हिसाब से गन्ना मूल्य बढ़ना चाहिए था।
मुजफ्फरनगर जिले में गन्ना मुख्य फसल है। दो लाख हेक्टेयर कृषि भूमि में से एक लाख 64 हजार हेक्टेयर जमीन पर गन्ने की फसल हो रही है। किसानों का पूरा अर्थ चक्र गन्ने के ईर्द-गिर्द ही घूमता है। वर्ष 2019-20 में चीनी मिलों को किसानों ने 1058 लाख क्विंटल गन्ना डाला है। किसानों को चीनी मिलों से 34 अरब तीन करोड़ का भुगतान हुआ है। भाजपा की योगी सरकार से किसानों को इस बार काफी उम्मीद थी कि वह गन्ने का मूल्य बढ़ाएगी। भैंसी निवासी गन्ना किसान राजू अहलावत कहते हैं कि तीन साल में डीएपी, डीजल, कीटनाशक और बिजली के रेट दोगुना से अधिक हो गए हैं। किसान की आमदनी दोगुनी की जगह आधी रह गई हैं।
जसोई गांव के किसान विजयपाल सैनी का कहना है कि तीन साल में मजदूरी, गन्ना कटाई के रेट दोगुने हो गए है। तीन साल पहले 200 रुपये मजदूरी थी, जो अब 400 रुपये हैं। गन्ना कटाई 30 रुपये से 50 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है। किसानों पर खर्च का भार बढ़ गया है। आमदनी में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।
पौधे पर 50 रुपये प्रति क्विंटल की अधिक लागत
मुजफ्फरनगर। गन्ने की पेड़ी के मुकाबले पौधे की खेती पर किसान की लगभग 50 रुपये प्रति क्विंटल की अधिक लागत आ रही है। पौधे की खेती में बीज, बुवाई, जुताई, खुदाई और निराई का खर्च बढ़ जाता है।