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गन्ना समितियों को चीनी मिलों से मिलें 56 करोड़

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गन्ना समितियों को 56 करोड़ कमीशन मिले
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मुजफ्फरनगर। जिले के आठ चीनी मिलों ने गन्ना समितियों को कमीशन के रूप में 56 करोड़ 10 लाख जारी किया है। कमीशन के इस पैसे का 75 प्रतिशत गन्ना समितियों और 25 प्रतिशत गन्ना विकास परिषद को जाता है। समिति अपने पैसे से वेतन और अन्य व्यवस्था करती है। गन्ना विकास परिषद सड़कों का निर्माण और किसानों के लिए चलाए जाने वाले कार्यक्रमों पर खर्च करता है।
जिले की चीनी मिलों ने वर्ष 2019-20 में गन्ना समितियों को कमीशन के रूप में 56 करोड़ जारी किए हैं। इनमें 32 करोड़ नौ लाख का भुगतान चीनी मिल समितियों को कर चुके हैं और 24 करोड़ का भुगतान चीनी मिलों पर बकाया है। तीन चीन मिल मोरना, रोहाना और तितावी कमीशन का पूरा भुगतान कर चुकी है, पांच चीनी मिलों पर बकाया है। इसमें खतौली पर 9.24 करोड़, मंसूरपुर पर 4.36 करोड़, भैसाना पर 4.57 करोड़, टिकौला पर 2.4 करोड़ और खाईखेडी पर कमीशन का 3.39 करोड़ बकाया है। कमीशन का चीनी मिलों से जो पैसा आता है, इस पैसे का 75 प्रतिशत गन्ना समितियों के पास रहता है और 25 प्रतिशत गन्ना विकास परिषद को जाता है। गन्ना समिति मिलने वाले पैसे से गन्ना समितियों के 250 के लगभग कर्मचारियों का वेतन, ऑफिस का मेंटेनेंस, स्टेशनरी, फर्नीचर आदि पर खर्च करती है। गन्ना विकास परिषद को जो पैसा जाता है उसमें सड़क निर्माण और विभाग की प्रचार-प्रसार की योजनाओं पर पैसा खर्च होता है।
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26 सड़कों का हुआ निर्माण
मुजफ्फरनगर। कमीशन के पैसे से 2019-20 के सत्र में जिले में 26 सड़कों को निर्माण हुआ। इन सड़कों पर आठ करोड़ खर्च किए गए। बाकी पैसा गन्ना विभाग की योजनाओं के प्रचार-प्रसार और कृषि यंत्र के अनुदान आदि पर खर्च हुआ।
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बाहर की समितियों को भी जाता है पैसा
मुजफ्फरनगर। जिला गन्ना अधिकारी डॉ आरडी द्विवेदी ने बताया कि हमारे जिले के चीनी मिलों पर दूसरे जिले की समितियों का गन्ना है। जैसे खतौली चीनी मिल में शामली, बागपत, मेरठ और मुजफ्फरनगर चार चीनी गन्ना समितियों का गन्ना आता है। गन्ने की आपूर्ति के हिसाब से बाहर की समितियों को उनका कमीशन चला जाता है। अन्य चीनी मिलों पर भी इसी तरह बाहरी समितियों का गन्ना आता है। बीस प्रतिशत के लगभग पैसा दूसरी समितियों को चला जाता है।
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