खतौली (मुजफ्फरनगर)। मोघपुर के किसान सुदेश पाल मलिक की जिंदगी शायर मुनव्वर राना के शेर, अभी जिंदा है मां मेरी, मुझे कुछ भी नहीं होगा, मैं घर से जब निकलता हूं दुआ भी साथ चलती है...को चरितार्थ करती है। जगबीरी देवी (95) को बुग्गी में बैठाकर किसान बेटा खुद खींचते हुए प्रयागराज की ओर चला है। बेटे ने कहा कि मेरे घुटने खराब हो गए थे, मां की दुआओं से फिर चलने लगा तो इसलिए मां को लेकर महाकुंभ की यात्रा पर निकल पड़ा।
यह सिर्फ महाकुंभ की यात्रा नहीं, बल्कि बिखरते परिवारों में अलग-थलग पड़ते बुजुर्गेां की सेवा का बड़ा उदाहरण भी है। इकलौते बेटे 65 साल के किसान सुदेश पाल बताते हैं कि चार साल पहले उसके घुटने खराब हो गए थे। डॉक्टरों ने जवाब दे दिया था, वह घर पर रहने लगा। सुबह-शाम मां की सेवा में बिताया और मां उसके पैरों और आंखों के लिए दुआ करती।
कुछ दिन बीतने के बाद वह ठीक होने लगा। घुटने ठीक हो गए तो एक साल पहले अपने गांव से 35 किमी दूर शकुतीर्थ की यात्रा पर मां को अपने कंधों पर बैठाकर ले गया था। किसान कहता है कि वह दोबारा चल रहा है तो इसमें मां की दुआओं का असर सबसे ज्यादा है।