इच्छाशक्ति को मजबूत बनाइए, जिंदगी को बचाइए
मुजफ्फरनगर
जिंदगी में छाई निराशा से निकलने के लिए इच्छा शक्ति को मजबूत करना जरूरी है। यह ऐसी शक्ति है कि आपकी जिंदगी को संवार सकती है। आत्महत्या करना किसी परेशानी का समाधान नहीं है। इन हालातों से उबरनेे के लिए सकारात्मक सोच वालों से अपनी व्यथा को लेकर लोग बातचीत कर सकते हैं। कोरोना काल में कारोबारी हो या नौकरीपेशा वाला सभी किसी न किसी समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे में जिले में करीब पांच महीने में आर्थिक तंगी और घरेलू कलह में करीब 25 लोगों ने खुद अपनी जिंदगी खत्म कर ली। इस फेहरिस्त में भाजपा नेता के कारोबारी भाई के साथ ही दो किसान व छह दुकानदारों के नाम भी शामिल होना हालात की भयावहता बयां करने के लिए काफी हैं। प्रस्तुत है केस स्टडी के आधार पर रिपोर्ट।
केस एक- जिले के भाजपा नेता संजय अग्रवाल के बड़े भाई अजय अग्रवाल ट्रांसपोर्टर थे, जिन्होंने तीन जून को अपने घर की छत पर लाइसेंसी रिवाल्वर से सिर में गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। घटना के एक सप्ताह बाद भाजपा नेता ने एआरटीओ पर आरोप लगाते हुए भाई द्वारा उनके उत्पीड़न से तंग आकर आत्महत्या किए जाने का दावा किया था।
केस दो- मंसूरपुर थाना क्षेत्र के गांव पुरबालियान निवासी किसान इलमूदीन ने 29 अगस्त को खेत पर जाकर जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी। परिजनों ने कर्ज होने का हवाला देते हुए आर्थिक तंगी के चलते आत्महत्या किए जाने का आरोप लगाया था।
केस तीन- आठ सितंबर को मंसूरपुर क्षेत्र के गांव दूधाहेड़ी में ग्रामीण महक सिंह ने फांसी लगाकर की आत्महत्या। ग्रामीण के भाई हरेंद्र ने उस पर सहकारी समिति का 88 हजार का कर्ज होने के कारण आर्थिक तंगी से आत्महत्या करने का दावा किया था।
केस चार- दो सितंबर को शहर के आदर्श कॉलोनी निवासी नई मंडी क्षेत्र के घड़ी व्यापारी मनु धीमान ने जहर खाकर जान दे दी। उसकी लाश हाईवे पर मिली थी। मृतक के भाई ने अगले दिन दो सूदखोरों पर महज 20 हजार रुपये के लिए मनु धीमान का उत्पीड़न करने का आरोप लगाते हुए नई मंडी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
केस पांच- शहर के सराफा बाजार निवासी पेंट कारोबारी अश्विनी (35) पुत्र महाराज सिंह ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों ने घटना के कारणों से अनभिज्ञता जताई, लेकिन चर्चा आर्थिक तंगी से जान देने की ही रही।
केस छह- भोपा क्षेत्र के गांव रहमतपुर निवासी दुकानदार संजय कश्यप ने 13 मई को लॉकडाउन के चलते व्यापार प्रभावित होने के कारण गंगनहर झाल में कूदकर आत्महत्या कर ली थी।
केस सात- ककरौली के गांव चौरावाला निवासी रवि पुत्र ऋषिपाल ने दो जुलाई को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों ने आर्थिक तंगी के कारण जान देने का दावा किया।
केस आठ- एक सितंबर को गांव छछरौली निवासी संदीप धीमान ने फांसी लगाकर की आत्महत्या। परिजनों ने आर्थिक तंगी के चलते शहर के एक कॉलेज में पत्नी की बीएड फीस जमा न कर पाने के चलते जान देने का दावा किया।
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अन्य मामले-
नौ मई : फुगाना थाना क्षेत्र के गांव डूंगर में नवीन उर्फ छोटू 25 पुत्र अजय ने सिर में गोली मारकर की आत्महत्या।
- तीन जुलाई : गांव अलमासपुर निवासी ब्रह्मसिंह ने गंगनहर में कूदकर की आत्महत्या।
- तीन जुलाई : भोकरहेड़ी निवासी प्रेमो ने गंगनहर में कूदकर दी जान।
दस जुलाई : मीरापुर के भुम्मा रोड पर अमित शर्मा पुत्र वीरेंद्र ने पत्नी से विवाद के चलते फांसी लगाकर की आत्महत्या।
21 जुलाई : भोपा में को गौरव पुत्र ऋषिपाल ने फांसी लगाकर की आत्महत्या।
30 जुलाई : शाहपुर के गांव कुटबा में पुष्पेंद्र पुत्र वीरसिंह ने जिंदगी खत्म की।
पांच अगस्त : शहर के नुमाइश केंप निवासी टेंपो चालक मनोज ने घरेलू कलह के चलते भोपा गंगनहर में कूदकर की आत्महत्या।
सात अगस्त : रतनपुरी के गांव मुजाहिदपुर में मोहित उर्फ छोटू ने गृहक्लेश के चलते फांसी लगाकर की आत्महत्या।
सात अगस्त : जानसठ के गांव कवाल में मांगेराम सैनी पुत्र जयपाल ने लगाई फांसी।
18 अगस्त : सठेड़ी गंगनहर पटरी पर मेरठ के सरधना के गांव मुल्हेडा निवासी आकाश ने लगाई फांसी।
27 अगस्त : पुरकाजी के मोहल्ला चमारान में गुलनवाज ने गृहक्लेश के चलते की आत्महत्या।
30 अगस्त : मंसूरपुर में जाहिद ने फांसी लगाकर की आत्महत्या।
मंसूरपुर के गांव गालिबपुर निवासी सुनील पुत्र बालमुकंद ने नावला में किसान के यहां की आत्महत्या।
वहलना में रवि कश्यप ने की फांसी लगाकर की आत्महत्या
तंगी ही नहीं आत्महत्या का कारण
मनोचिकित्सक डॉ सुजीत कुमार सिंह का कहना है कि कोविड-19 के चलते लोगों की कमाई का स्त्रोत प्रभावित हुआ है। इसके बावजूद केवल पैसे की तंगी ही आत्महत्या का इकलौता कारण नहीं है। हर व्यक्ति की अलग शख्सियत होती है, जो लोग बातों को छिपाते हैं, परिजनों या दोस्तों से समस्याओं को शेयर नहीं कर पाते, उनमें इस तरह की एक्टिविटी अधिक होती है। आत्महत्या का नकारात्मक पीरियड दस से 12 दिन का होता है। यदि इस समय को किसी भी तरह टाल दिया जाए, तो व्यक्ति के मन से इस तरह के विचार खत्म हो जाते हैं।