मुजफ्फरनगर। स्वस्थ रहने के लिए रोजाना कम से कम सात घंटे की नींद बेहद जरूरी है, लेकिन बदलती जीवनशैली में लोग अनिद्रा यानि इंसोम्निया के शिकार हो रहे हैं। बुजुर्गों के साथ ही युवा वर्ग भी तेजी से इस बीमारी की चपेट में आ रहा है। अनिद्रा की बीमारी का सीधा संबंध मानसिक रोग एवं हमारी जीवनशैली से जुड़ा है। हमारे रहन-सहन में हो रहे बदलाव के कारण यह बीमारी बढ़ती जा रही है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब 50 लोग मानसिक समस्याओं से घिरे आते हैं। इनमें से 12 से 15 लोग अनिद्रा के शिकार होते हैं।
रात में नहीं आती नींद, दिन में छाई रहती है सुस्ती
मुजफ्फरनगर। जिला अस्पताल में करीब 15 दिन से उपचार के लिए आने वाले 50 वर्षीय मुकेश कुमार बताते हैं कि उन्हें काफी समय से नींद न आने की परेशानी है। शुरुआत में तो उन्होंने इसे सामान्य समझा, लेकिन समस्या बढ़ती गई। रात में थोड़ी देर के लिए नींद आती और फिर बेचैनी होने लगती। नींद पूरी नहीं होने के कारण दिन में सुस्ती छाई रहती है। किसी भी काम में मन नहीं लगता। जब से उपचार शुरू किया है, काफी राहत मिली है।
तनाव और असंतुलित खानपान बन रहा कारण
जिला अस्पताल के साइको थैरेपिस्ट मनोज कुमार बताते हैं कि अनिद्रा के कई कारण हैं। घर-परिवार, पति-पत्नी के संबंधों में तकरार, स्ट्रेस और करियर को लेकर तनाव, असंतुलित खानपान, डिप्रेशन, शाम के समय काफी, चाय आदि का सेवन एवं फास्ट फूड अनिद्रा का कारण बन रहे हैं। बढ़ती उम्र के साथ भी अनिद्रा की बीमारी बढ़ती है। आजकल मोबाइल और इंटरनेट का ज्यादा इस्तेमाल भी अनिद्रा का सबसे बढ़ा कारण है। युवा रात भर मोबाइल पर चैटिंग या वीडियो देखते रहते हैं और नींद का समय गुजर जाता है। वह बताते हैं कि नींद आने का सही समय नौ से दस बजे के बीच का है। यह समय गुजर जाता है तो समस्या होती है। अगले दिन देर तक सोना भी नुकसानदायक है। इसलिए नौ से दस बजे के बीच सोएं और पूरी सात घंटे की नींद लें।
अनिद्रा से बचने के लिए बरतें सावधानियां
- शाम को कैफीन युक्त काफी, कोल्ड ड्रिंक, निकोटिन युक्त चाय, फास्ट फूड, जंक फूड का सेवन न करें।
- मोबाइल का इस्तेमाल संतुलित करें।
- सोने से पहले ठंडे या गुनगुने पानी से हाथ-पैर अच्छी तरह धोएं।
- रात में ढीले कपड़े पहनकर लेटें।
- शाम को हल्का एवं सुपाच्य भोजन करें।
- सोने से पूर्व कुुछ एक्सरसाइज या सांस से संबंधित आसन करें।