राज्य कर्मचारियों की हड़ताल से दूसरे दिन भी कार्यालयों में ताले लटके रहे। विकास भवन के सभी दफ्तर बंद कर कर्मचारी परिसर में धरने पर डटे रहे। चेतावनी दी है कि यदि उनकी पुरानी पेंशन बहाली की मांग को अनदेखा किया जाता है तो इसका खामियाजा आने वाले चुनाव में भुगतना होगा। हड़ताल के चलते दो दिन से कार्यालयों में काम नहीं होने से लोग परेशान रहे।
राज्य कर्मचारी महासंघ केंद्रीय आह्वान पर दो दिन से हड़ताल पर है। बुधवार को दूसरे दिन भी विकास भवन के दफ्तरों में काम नहीं हुआ। कर्मचारी दफ्तर बंद कर परिसर में धरना देते रहे। धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने सरकार को चेताया कि यदि पुरानी पेंशन को बहाल नहीं की गई तो इसका असर आने वाले चुनाव में दिखेगा। राज्य कर्मचारी महासंघ के संयुक्त सचिव रविंद्र नागर, मंत्री कुलदीप शर्मा, सिंचाई विभाग से मंडल सचिव प्रवीण गोयल ने कहा कि पुरानी पेंशन कर्मचारी का अधिकार है।
इसके लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ी जाएगी। शिक्षिका राखी और नीतू ने कहा कि पेंशन के लिए आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी। कर्मचारी और उनका परिवार व रिश्तेदार नोटा का प्रयोग करेंगे। धरने को अरविंद बालियान, प्राथमिक शिक्षक संघ से हरेंद्र मलिक, हितेश चौधरी, जय गिरि, पवन गिरि, कृष्णपाल,, सिंधू चौहान, अनुज वीर सिंह, बृजराज सिंह, अजीत, संतोष, संजीव लांबा, सुमन, मुनेश चौधरी, शरीफ अहमद, अली नवाज, कबूल सिंह, अरविंद मलिक आदि ने विचार रखे। संचालन महासंघ के जिलाध्यक्ष राहुल चौधरी ने किया।
कार्यालयों में नहीं हुआ काम
कर्मचारियों की हड़ताल के कारण दफ्तरों में आने वाले लोगों को निराश लौटना पड़ा। सबसे ज्यादा लोग पेंशन एवं आवास की समस्या को लेकर आए। प्रधानमंत्री आवास के संबंध प्रार्थना पत्र जमा करने आए जमरुद्दीन, फहमीदा और संतोष के आवेदन जमा नहीं हो सके। समाज कल्याण विभाग में वृद्धावस्था पेंशन की समस्या के संबंध में आए मंसूरपुर के यादराम का भी काम नहीं हो सका।
सातवें वेतन की खामियों को किया जाए दूर
लोक निर्माण विभाग मिनिस्टीरियल एसोसिएशन ने पुरानी पेंशन सहित सातवें वेतन आयोग की खामियों को दूर करने तथा आउट सोर्सिंग के पदों पर नियमित नियुक्ति करने की मांग को लेकर कार्य बहिष्कार किया। कार्यालय परिसर में आयोजित धरने को क्षेत्रीय महामंत्री नीरज गुप्ता, यशवीर सिंह पवार, रणवीर सिंह सैनी, अध्यक्ष विनोद त्यागी, विपिन कुमार, देवीचंद, अरविंद कुमार, मुरसलीन, राकेश शर्मा, गोपाल सिंह रहे।