शुकतीर्थ स्थित महाशक्ति सीद्धपीठ आश्रम में नव निर्मित श्री बालाजी योग अनुसंधान केंद्र में तांब?
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मोरना। महाशक्ति सिद्धपीठ आश्रम में श्री बालाजी योग विज्ञान अनुसंधान केंद्र आरंभ हो गया है, जिसमें तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा समारोह दो जुलाई को विशेष पूजा के साथ संपन्न होगा। इस मौके पर वीर हनुमान जी तांबे से बनी 50 किग्रा की गदा का विशेष पूजा अर्चना की।
शुभारंभ कार्यक्रम में हुए माता राजनंदेश्वरी साध्वी ने कहा कि बालाजी योग देव लोक का सोमरस है, जिसका पान करने से मानव अमरत्व प्राप्त कर सकता है। जहां प्रकृति है, वहां तेज और शब्द है। जहां तेज और शब्द है, वहां ईश्वर है। जहां ईश्वर वहां जीव भी अवश्य है। अनिवार्य वाद के जीवन में ऋषि मुनियों के जीवन में उनके द्वारा किए गए अंतरक्षीय अनुसंधान सदैव शाश्वत हैं। सत्य ही विज्ञान वेत्ता अनुसंधान करने का गौरव है। विज्ञान साकार करता है, आध्यात्म जानता है।
योगी राज प्रकाशानंद महाराज ने कहा कि मानव जीवन का यह स्वभाव है कि प्रतिक्षण नवीनता चाहता है। यह प्रकृति परिवर्तनशील है, इसी आधार पर भौतिक विज्ञानी निरंतर नए-नए अविष्कार करते हैं। योगीजन अध्यात्मवेता आत्म विज्ञानी भी आध्यात्म प्रयोगशाला में समाधिस्थ होकर अनुसंधान करते हैं। इससे पूर्व आचार्य पंडित शिव नारायण शास्त्री, मोहित कौशिक, कपिल शर्मा आदि ने वैदिक मंत्रोचारण के बीच मुख्य यज्ञमान राकेश अग्रवाल, मीरा, अविनाश त्यागी, उर्वशी, संजय अग्रवाल, शैली आदि ने मुरादाबाद से पीतल की बनी गदा की विशेष पूजा अर्चना कर श्री बालाजी योग विज्ञान अनुसंधान केंद्र में स्थापित करने में मुख्य भूमिका निभाई।