मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना में मिस्ड कॉल के जरिये परवान चढ़ी प्रेम कहानी का ऐसा हस्र होगा, कोई नहीं जानता था। बुढ़ाना में मिली युवक और युवती की लाशों की गुरुवार को शिनाख्त हो गई। साथ ही मौत के रहस्य से परदा भी उठ गया। युवक के परिजनों के शादी से इंकार करने पर दोनों ने घर में जहर खा लिया था। परिजन दोनों को बड़ौत के एक हॉस्पिटल ले गए। युवक-युवती के दम तोड़ने पर पुलिस से घबराए परिजन दोनों लाशों को विज्ञाना के जंगल में फेंक गए। अखबारों में फोटो प्रकाशित होने पर गांव के लोगों ने शवों की पहचान की।
बुधवार को बुढ़ाना के विज्ञाना रोड पर मिली दो लाशों के राज से परदा उठ गया। पुलिस के मुताबिक युवक बागपत जिले के भड़ल गांव के राजेंद्र लुहार का बेटा आशीष (25) था, जबकि युवती मोनी (20) हरिद्वार के थाना लक्सर के गांव शिवपुरी निवासी लख्मीचंद की बेटी थी। आशीष कार चालक था। कुछ माह पहले उसकी गलती से मोनी के मोबाइल पर कॉल लग गई। रांग नंबर पर कुछ देर बात हुई, इसके बाद दोनों में बातचीत का सिलसिला चल निकला।
दोनों के बीच मोहब्बत हो गई। दोनों ही साथ जीने-मरने की कसमें खाने लगे। मोनी एक दिसंबर को प्रेमी आशीष से मिलने उसके घर आ गई। आशीष के पिता राजेंद्र और मां सुनीता को पूरे घटनाक्रम की जानकारी हुई तो उन्होंने दोनों को समझाया। आशीष का पिता राजेंद्र मोनी को समझा-बुझाकर उसके घर छोड़ आया, लेकिन वह नहीं मानी। वह आठ दिसंबर को फिर प्रेमी के पास भड़ल गांव आ गई।
मोनी के भड़ल आते ही माता-पिता की आशीष से खूब कहासुनी हुई। पुलिस की पूछताछ में मोनी की मां ने बताया कि शाम को मोनी ने खाना खा लिया था, जबकि आशीष नाराज था। रात में दोनों अपने कमरे में सोने चले गए। घंटों बाद उनके कमरे से उल्टी लगने की आवाज आई तो घबराकर आशीष के माता-पिता ने दरवाजा खुलवाया। दोनों ने किसी जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया था। आनन-फानन में पिता राजेंद्र दोनों को बड़ौत चिकित्सालय में डॉक्टर आनंद के पास ले गया। डॉ आनंद ने मोनी को मृत घोषित कर दिया और आशीष को मेरठ के लिए रेफर कर दिया।
बड़ौत चिकित्सालय से निकलते ही आशीष ने भी दम तोड़ दिया। दोनों की मौत होने पर आशीष के पिता राजेंद्र और उसके परिवार वालों के हाथ-पैर फूल गए। हत्या के मुकदमे की आशंका के कारण उन्होंने जिगर के टुकड़े और उसकी प्रेमिका को बुढ़ाना के विज्ञाना मार्ग पर जंगल में फेंक दिया। इंस्पेक्टर कमल सिंह यादव ने बताया कि अखबारों में छपी फोटो से गांव के लोगों ने आशीष की शिनाख्त की।
पुलिस ने भड़ल गांव पहुंचकर आशीष की मां से पूछताछ की तो पूरे मामले का खुलासा हो गया। पुलिस आशीष की मां सुनीता और बहन डोली को कोतवाली ले आई। पुलिस की एक टीम ने बड़ौत पहुंचकर डॉ आनंद तोमर से घटना के बारे में पूछताछ की। डॉक्टर ने बताया कि वह दोनों को उनके क्लिनिक पर लाए थे। मौत होने पर उन्होंने पुलिस को इत्तला की थी, लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही परिजन उन्हें ले गए।
पुलिस ने घटना की सूचना लड़की के परिजनों को हरिद्वार के शिवपुरी में दी। दोनों के परिजन शवों को लेने के लिए मोर्चरी पहुंच गए। युवती के भाई बिंदर ने बताया कि उन्हें नहीं पता था कि मोनी के साथ यह सब चल रहा था। यह उम्मीद भी नहीं थी कि उसकी बहन इस तरह जान दे देगी। इंस्पेक्टर कमल सिंह यादव का कहना है कि पुलिस सभी बिंदुओं पर घटना की जांच कर रही है, जो भी तथ्य सामने आएंगे उनके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
युवक आशीष और युवती मोनी के परिवारों की माली हालत अच्छी नहीं है। बिरादरी से आशीष हिंदू लुहार और युवती मोनी कश्यप थी। युवक के पिता अलग बिरादरी में शादी का विरोध कर रहे थे। आशीष खुद टैक्सी चलाने का काम करता था, जबकि युवती का पूरा परिवार मजदूरी पेशा है। लाश जंगल में फेंकने के जुर्म में पुलिस भी कोई कार्रवाई के मूड में नहीं है।
आशीष की हो चुकी थी मंगनी
बुढ़ाना। मृतक आशीष की मां सुनीता ने कोतवाली में पुलिस को बताया कि आशीष की शादी के लिए मंगनी हो चुकी थी। उसकी शादी 27 फरवरी को होनी थी। यह शादी बुढ़ाना के ही दताना गांव से होनी थी। उन्हें क्या पता था कि शादी से पहले ही उसका किसी लड़की से प्यार हो जाएगा। अगर उन्हें यह मालूम होता तो वह कभी दोनों को अलग करने की बात सोचते भी नहीं।