मोरना में सोलानी नदी से पानी के तेज प्रवाह के कारण किसानों की हजारों बीघा फसल बर्बाद हो गई। किसानों ने बताया कि फसलों के बर्बाद होने से काफी नुकसान पहुंचा है। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की। किसानों ने समस्या से निजात नहीं मिलने पर डीएम कार्यालय पर आत्मदाह करने की चेतावनी दी है।
नदियों के संरक्षण और उनकी सफाई के दावे सरकार कितने भी करे, किंतु नदी संरक्षण की योजनाएं फाइलों तक सिमट कर रह गई हैं। मोरना और शुक्रताल गंगा खादर क्षेत्र में बह रही गंगा की सहायक नदी सोलानी के अस्तित्व पर संकट गहरा गया है।
पुरकाजी क्षेत्र के अलमावाला क्षेत्र में सिल्ट व अन्य गंदगी के कारण सोलानी नदी ढाई किलोमीटर तक चोक हो गई है, जिसका पानी हजारों बीघा जमीन में फैल रहा है। बिना बरसात के आई बाढ़ से मोरना क्षेत्र के गांव योगेंद्रनगर के कानावाली बख्शीराम नामक जंगल में किसानों की दो हजार बीघा से अधिक गन्ने की फसल तबाह हो गई है।
किसानों ने बताया कि पिछले कई माह से जानसठ तहसील और मुख्यमंत्री कार्यालय तक वे शिकायत भेज चुके हैं, किंतु नदी की सफाई न होने से उनकी गन्ने की फसल तबाह हो गई है। गेहूं की बुआई भी नहीं हो पाएगी। किसानों के खेत नदी बनकर रह गए हैं।
फसल नहीं होने के कारण उनके परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएंगे। वहीं, तीर्थस्थल शुक्रताल में मुख्य रूप से सोलानी नदी की धारा का पानी गंगा के साथ बहता है। सोलानी नदी के चोक होने से शुक्रताल स्थित गंगा में जलस्तर काफी कम हो गया है।
किसान राजकमल, प्रताप, विपिन, प्रमोद, मनकुमार, रोहताश, लोकपाल, नितरपाल, सुभाष, हमेशा, अमरसिंह, भूप सिंह, चतरपाल, जगदीश, तेजपाल, पीतम, तेज्जा, धनीराम, भूपेंद्र, बेबी, कमला, हुनरकली, शकुंतला, संतोष, सुषमा आदि ने डीएम कार्यालय पर धरना प्रदर्शन कर आत्मदाह की चेतावनी दी है।