कमल के आसन पर विराजमान रहती है स्कंद माता
देवबंद (सहारनपुर)। चैत्र नवरात्र के पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की आराधना की गई। पुजारियों का कहना है कि स्कंद की माता होने के कारण शास्त्रों में इन्हें स्कंदमाता कहा गया है।
शक्तिपीठ श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर सेवा ट्रस्ट अध्यक्ष पंडित सतेंद्र शर्मा ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक स्कंद देवता कोई और नहीं बल्कि भगवान शंकर के पुत्र कार्तिकेय को ही जाता है। देवी स्कंद माता की गोद में स्कंद देवता हमेशा विराजमान रहते हैं। उन्होंने बताया कि स्कंद माता की चार भुजाएं हैं। ये दाहिनी तरफ की ऊपर वाली भुजा से भगवान स्कंद को गोद में पकड़े हुए है। बाई तरफ की ऊपर वाली भुजा में वर मुद्रा में तथा नीचे वाली भुजा जो ऊपर की ओर उठी है, उसमें कमल पुष्प लिए हुए है। स्कंद माता कमल के आसन पर विराजमान रहती है। शेर पर सवार होकर माता दुर्गा अपने पांचवें स्वरूप स्कंदमाता के रूप में भक्तजनों के कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहती है।
घरों में ही चल रहे दुर्गा सप्तशती पाठ
गंगोह। नगर एवं क्षेत्र में मां दुर्गा के भजनों की धूम मची हुई है। कोरोना के कारण इस बार लोग घरों में ही रह कर पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन कर मां भगवती से विश्व को संकट से निकालने की प्रार्थना कर रहे हैं। रविवार को मां दुर्गा के पांचवे रूप स्कंद माता की पूजा की गई। इस बार किसी भी देवी मंदिर में पाठ नहीं बिठाए गए हैं। कोरोना वायरस के प्रभाव के चलते भी लोगों की आस्था पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।
भक्तों ने की स्कंदमाता माता की पूजा-अर्चना
सहारनपुर। चैत्र नवरात्र के पांचवें दिन मां भगवती के स्वरूप मां स्कंदमाता की भक्तों ने पूजा-अर्चना की। भक्तों ने मां जगदंबा से कोरोना वायरस से बचाव की प्रार्थना की।
महानगर के श्री दुर्गा मंदिर, श्री भूतेश्वर महादेव मंदिर, श्री हरि मंदिर, श्री बालाजी धाम, चौंताला स्थित श्री बालाजी मंदिर, श्री विश्रामपुरी काल भैरव मंदिर, तहसील शिव मंदिर, श्री मातेश्वरी धाम, श्री मां काली मंदिर, श्री मंशापूर्ण हनुमान मंदिर, श्री नारायणपुरी मंदिर, श्री पातालेश्वर महादेव मंदिर, श्री पाठेश्वर महादेव मंदिर और श्री बागेश्वर महादेव मंदिर सहित सभी मंदिरों में अधिष्ठाताओं ने सुबह और शाम के समय मां भगवती की आरती की।
देवबंद की गांधी कालोनी में मां दुर्गा के पांचवे स्वरूप स्कंदमाता की पूजा अर्चना करते श्रद्धालु- फोटो : DEVBAND