चरथावल। साढ़े चार साल बीतने के बावजूद बधाई कलां गांव में जिले का पहला सामान्य सुविधा केंद्र (सीएफसी) का संचालन नहीं हो पा रहा है। मार्च में भवन निर्माण का कार्य पूरा होने के बाद तकनीकी कारणों से मशीनरी एवं संसाधन मुहैया नहीं हो पा रहे है। भवन निर्माण की लागत से अलग करीब तीन कराेड़ रुपयों से यहां मशीनरी एवं प्रशिक्षण सामग्री आनी है।
किसानों को गुड़ उत्पाद की पैकेजिंग कराकर दूरस्थ प्रांतों में आपूर्ति करने का सपना अभी अधूरा है। क्षेत्र में गन्ने के उत्पादों की आधुनिक लैब में परीक्षण के बाद बेहतरीन पैकेजिंग के लिए सामान्य सुविधा केंद्र (सीएफसी) का तोहफा मिला था। भवन निर्माण पूरा होने को अरसा बीतने के बाद भी मशीनरी एवं उपकरण नहीं आ पा रहे हैं। 22 अक्तूबर को कानपुर मुख्यालय से फाइल दोबारा टेंडर प्रक्रिया के लिए लखनऊ भेजी गई है। टेंडर आने के बाद मशीनरी आ पाएगी।
चरथावल ब्लॉक में इस केंद्र की स्थापना से जिलेभर के किसानों को फायदा होगा। कोल्हू- क्रेशरों पर तैयार उत्पाद गुड़-शक्कर की जांच के लिए आधुनिक मशीनरी केंद्र में लगेगी। गन्ना उत्पादकों का ब्रांडेड गुड़ शक्कर देश-दुनिया में आपूर्ति होगा। युवा किसानों को प्रशिक्षण के जरिए तकनीकी ज्ञान प्राप्त होगा। यहां गन्ने से संबंधी गुड़, शक्कर, राब, खांड, ब्राउन शुगर एवं सिरका आदि की आकर्षक पैकिंग सुविधा मिलेगी।
जून 2021 में हुआ था शिलान्यास
ओडीओपी योजना के 23 जून वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्चुअल शिलान्यास किया था। मुजफ्फरनगर में गुड़ उत्पादों के लिए आधुनिक तकनीकीयुक्त गुड़ प्रसंस्करण, पैकेजिंग यूनिट एवं टेस्टिंग फेसिलिटी सेंटर केंद्र को मंजूरी दी थी। चार साल तक धीमी रफ्तार से भवन तैयार हो पाया।
अधिकृत कंपनी से जुड़े 126 किसान
गांव की अधिकृत कंपनी को सीएफसी का दायित्व दिया गया है। इसमें 126 किसानों को जोड़ा हैं। अरविंद मलिक कंपनी के अध्यक्ष हैं। यहां तैयार उत्पाद के मानक जांचने के लिए लिए टेस्टिंग लैब रहेगी। शासन ने 5.10 करोड़ रुपयों के बजट स्वीकृत किया था। 1936 करोड़ रुपये बिल्डिंग में लगे हैं, बाकी रकम सेटअप और मशीनरी में लगेगी। दो मंजिला भवन, एक लैब, कमरे, मीटिंग हॉल, प्रशिक्षण हॉल तैयार किए हैं।
कंपनी के चेयरमैन अरविंद मलिक ने बताया करीब तीन करोड़ रुपये से क्रेशर, कांटा, बॉयलर एवं प्रशिक्षण के लिए संबंधित उपकरण आने है। लेकिन मशीनरी नहीं आने से लोगों को सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। करीब पांच महीने पहले टेंडर आमंत्रित किए गए थे, लेकिन विभाग का मानक पूरा नहीं करने के कारण कंपनी के टेंडर प्रक्रिया निरस्त करनी पड़ी थी। इसके बाद दोबारा टेंडर प्रक्रियाधीन है।