मुजफ्फरनगर। जल ही जीवन है। जल है, तो कल है। इन नारों को रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाकर भी साकार किया जा सकता है। जल संचय के लिए ऐसा ही कुछ राजकीय इंटर कॉलेज और गांधी पॉलीटेक्निक के भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग लगाकर किया जाएगा। यहां एक साल में 36 लाख लीटर से अधिक बारिश का शुद्ध पानी भूमि में रिचार्ज होगा।
भूगर्भ जल विभाग की ओर से राजकीय इंटर कॉलेज की 3300 वर्ग मीटर छत पर रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित किया जाएगा। जिस पर करीब 26 लाख रुपये का खर्च आएगा। गांधी पॉलीटेक्निक की करीब 1400 वर्ग मीटर छत पर सिस्टम लगाने में 17 लाख से अधिक रुपये का खर्च आएगा। दोनों छतों के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 36 लाख लीटर बारिश का पानी रिचार्ज किया जाएगा। जिसके लिए करीब 55 मीटर गहरा रिचार्ज वेल तैयार कराया जाएगा।
नियम पालन न होने से पैदा हो रहा भूगर्भ जल संकट
भूगर्भ जल स्तर नीचे जाने से बचाने के लिए सरकारी प्रयास नाकाफी साबित हुए हैं। शासन की ओर से जारी निर्देशों के मुताबिक विकास प्राधिकरण बिना वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के कोई भी व्यावसायिक नक्शा पास नहीं करेगा। लेकिन इस नियम की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। नक्शे में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम दिखा दिया जाता है लेकिन भवन में उसे स्थापित नहीं किया जाता। ऐसे ही 100 वर्ग मीटर से अधिक के आवासीय भवनों के निर्माण में भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने की बाध्यता है। नक्शा पास कराते समय पांच वर्ष के दौरान सिस्टम चालू करने की बाध्यता है, जिसे शपथ पत्र पर लिखकर देना होता है। लेकिन उसके बाद पड़ताल नहीं की जाती।
भूगर्भ जल विभाग के अवर अभियंता पुष्कर सिंह का कहना है कि शीघ्र ही राजकीय इंटर कॉलेज व गांधी पॉलीटेक्निक स्कूल की छतों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए जाएंगे। जिनके लिए टेंडर प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है।