हेपेटाइटिस जिंदगी का ‘साइलेंट किलर’
मुजफ्फरनगर। स्वस्थ जीवन में हेपेटाइटिस की बीमारी ‘साइलेंट किलर’ है। जागरूकता की कमी में वक्त पर परीक्षण और उपचार नहीं मिलने से हेपेटाइटिस रोगियों की तादाद बढ़ रही है। जिले में ही बीते छह माह में रक्त जांच के दौरान हेपेटाइटिस बी और सी के क्रमश: 62 तथा 29 यानि कुल 91 मरीज सामने आ चुके हैं।
जिंदगी पर टीबी के बाद सबसे बड़ा खतरा हेपेटाइटिस बी और सी की घातक बीमारी का है। अनेक रोगों में हेपेटाइटिस मुख्य वजह है। यह बीमारी संक्रामक है, जो कि लिवर में सूजन और जलन पैदा करती है। प्रारंभ में लक्षण नहीं दिखते हैं। वैसे तो हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी, ई पांच प्रकार के होते हैं, मगर बी और सी सबसे ज्यादा संक्रमित हैं। जिले में भी हेपेटाइटिस को लेकर जागरूकता का अभाव है। बीते छह माह में स्वामी कल्याणदेव राजकीय जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक में जिन्होंने रक्त दिया, उनमें कुल 91 लोग हेपेटाइटिस संक्रमित मिले हैं। गंभीर पहलू यह भी है कि काली नदी के किनारे बसे गांवों में अधिक हेपेटाइटिस के मामले मिले हैं, जिनमें गांव बोपाडा तथा पुरबालियान मुख्य है। यह स्थिति अधिक चिंताजनक बने, इसके लिए हेपेटाइटिस उन्मूलन की पहल जरूरी हो गई है। कोरोना के संकट के दौरान मौजूदा साल में इस दिवस को हेपेटाइटिस मुक्त भविष्य की थीम दी गई है, जो मां और नवजात में हेपेटाइटिस रोकने पर केंद्रित हैं। हालांकि जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस रोग के उपचार की सुविधा नहीं है।
जिला अस्पताल में लगेगी हेपेटाइटिस यूनिट
कोविड-19 की आपदा पर नियंत्रण के उपरांत स्वामी कल्याणदेव जिला चिकित्सालय में हेपेटाइटिस रोगों के उपचार हेतु यूनिट लगाई जाएगी। यह संक्रमण दूषित पेयजल तथा भोजन से फैलता है। जिले में स्वास्थ्य विभाग जांच शिविरों में लोगों को हेपेटाइटिस के लक्षण व बचाव के प्रति जागरूकता अभियान चला रहे हैं - डॉ. प्रवीण चोपड़ा, सीएमओ।
पीलिया में हेपेटाइटिस की जांच जरूरी
पीलिया यदि बार-बार होता है, तब हेपेटाइटिस की जांच अवश्य कराएं। आंखें व शरीर का रंग पीला पड़ना, सफेद या काले दस्त आना, अपच और उल्टी, पेट में सूजन व दर्द , थकान जैसे लक्षण जब दिखे, सचेत हो जाएं। बीमार महसूस करना, सिरदर्द और चिड़चिड़ापन बढ़ना, अचानक शरीर नीला पड़ना इत्यादि भी हेपेटाइटिस के कारण हो सकते है। सही वक्त पर इलाज कराए तो इस घातक रोग से सुरक्षा संभव है - डॉ. रविंद्र सिंह, एमबीबीएस, एमडी।
दवाइयों और वैक्सीन से संभव इलाज
लिवर संबंधी बीमारियों में हेपेटाइटिस से बचाव महत्वपूर्ण है। सिरोसिस के रोगी, लिवर कैंसर का जिनका फैमिली हिस्ट्री, आईवी ड्रग्स लेते हैं, ज्यादा टेटू बनवाना आदि मामलों में हेपेटाइटिस का सीधा खतरा है। समय से दवाईयों से उपचार संभव है। रोकथाम को वैक्सीन भी उपलब्ध है - डॉ. योगेंद्र त्रिखा, वरिष्ठ फिजिशियन, स्वामी कल्याणदेव जिला चिकित्सालय।