भारत बंद की अफवाह का असर रेल और सड़क यातायात पर भी दिखाई दिया। बस और ट्रेन खाली दौड़ती रही है। चंद घंटों में दोनों विभागों का लाखों का फटका लगा है। इससे अधिकारियों की टेंशन बढ़ गई है। बंद की भनक से डिपो के कई चालक-परिचालक गायब रहे। इससे भी बसों के पहिये थमे रहे।
सोशल मीडिया पर 10 अप्रैल को भारत बंद के एलान के प्रचार ने लोगों में दहशत बैठा दी। शासन-प्रशासन की लाख कोशिशें भी लोगों के दिलो-दिमाग से डर नहीं निकाल पाई। नतीजा मंगलवार को सबके सामने रहा। अफवाहों का दौर ऐसा छाया कि सड़क और रेलमार्ग दोनों पर दिन निकलते ही सन्नाटा छा गया।
दोपहर होते-होते रेलवे स्टेशन पर जीआरपी, आरपीएफ के बूटों की आवाज तो आई, लेकिन यात्रियों की चहल-पहल थम गई। सुबह साढ़े आठ के बाद आई दिल्ली से अंबाला जाने वाली पैसेंजर में यात्रियों की संख्या औसत रही।
इसी तरह दिल्ली-सहारनपुर पैसेंजर, उत्कल एक्सप्रेस, जालंधर एक्सप्रेस के अलावा डाउन में इंटर सिटी एक्सप्रेस, देहरादून, नौचंदी एक्सप्रेस में भी यात्रियों का टोटा दिखाई दिया। स्टेशन पर बंद की अफवाह के कारण 300 टिकट बिके हैं। इसके अलावा रोडवेज का हाल भी बुरा रहा है।
बंद की भनक लगने पर करीब आधा दर्जन चालक-परिचालक डिपो नहीं पहुंचे। दिल्ली, गाजियाबाद के साथ हरिद्वार, रुड़की की तरह जाने वाली बसें खाली दौड़ी है। विभाग को चंद घंटों में करीब 5 से छह लाख रुपये का फटका लगा है। एआरएम बीपी अग्रवाल ने बताया कि बसों के संचालन को लेकर पूरी सक्रियता बरती गई है, लेकिन आम दिनों के मुकाबले बसों में यात्रियों की संख्या कमतर आंकी गई है। इससे विभाग को नुकसान हुआ है।