मुजफ्फरनगर के शुक्रताल में भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि शरद पूर्णिमा पर पूर्णाकार चंद्रमा की अमृत वर्षा से सुख-समृद्धि आयेगी और शरीर निरोगी बनेगा। प्राचीन काल से ही शरद पूर्णिमा को भारत की सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पर्व माना गया है।
शरद पूर्णिमा पर गंगा स्नान के लिए शुकतीर्थ में श्रद्धालु जुट गए हैं। शनिवार को शरद पूर्णिमा का पर्व है। श्री शुकदेव आश्रम में कई प्रांतों से आये भागवत भक्तों को आशीर्वचन में स्वामी ओमानंद ने कहा कि त्रियोग होने के साथ पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी पूर्णकला से परिपूर्ण रहेगा। ब्रहममुहूर्त में चंद्रमा की किरणे एक विशेष कोण से गंगाजल पर पडती हैं, जिनसे अमृत झरता है।
स्वास्थ्य की दृष्टि से शरद पूर्णिमा स्नान से शरीर निरोगी बनता है। शास्त्रों में इस पर्व का महत्व वर्णित है। मध्य रात्रि के बाद चंद्रमा की अमृत वर्षा का लाभ प्रत्येक प्राणी को मिलता है। खीर का प्रसाद चंद्रमा की किरणों में रखकर खाने से रोगी रोग मुक्त हो जाता है।
खीर का प्रसाद ग्रहण करने से सुख समृद्धि आती है। स्वामी जी ने कहा कि गंगा स्नान के बाद दीप दान, यज्ञ और अन्न दान आदि करना चाहिए, ताकि मनोकामना पूर्ण हो। शरद पूर्णिमा की रात्रि भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला का श्रीमद्भागवत में वर्णन दिया गया है।
श्रद्धालु व्रत रखकर विधि विधान से पूजा अर्चना करें। इस दिन पूरा चंद्रमा दिखाई देने के कारण इसे महापूर्णिमा भी कहते हैं। अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा शरद पूर्णिमा के रुप में मनाई जाती है। उन्होंने कहा कि वैदिक ज्योतिष विज्ञान में मन का स्वामी चंद्रमा माना गया है। चंद्रमा यदि दोषयुक्त है तो व्यक्ति का मानसिक संतुलन स्थिर नहीं रहता।