साहित्यकार रोहित कौशिक ने बताया कि सेवाराम यात्री का जनपद से गहरा लगाव रहा। नौकरी के सिलसिले में जिले से बाहर रहने के बावजूद वह वाणी के कार्यक्रमों में कई बार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल रहे और युवाओं को बढ़ावा दिया। साहित्यकार मनु स्वामी ने कहा कि परिवार के जनपद से जुड़ा होने के कारण उनका यहां के लोगों से हमेशा विशेष स्नेह रहा। वह हमेशा प्रेरणा स्रोत रहेंगे।
इस तरह चलती रही साहित्य-शिक्षा की यात्रा
आगरा विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान और हिंदी साहित्य में एमए किया। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर महाविद्यालय में शिक्षक बनें। गाजियाबाद और खुर्जा के कॉलेजों में हिंदी प्रवक्ता रहे और महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से राइटर-इन-रेजीडेंस के पद से सेवानिवृत हुए।
ये रहे प्रमुख उपन्यास
दराजों में बंद दस्तावेज, लौटते हुए, कई अंधेरो के पार, अपरिचित शेष, चांदनी के आरपार, बीच की दरार, टूटते दायरे, चादर के बाहर, प्यासी नदी, भटका मेघ, आकाशचारी, आत्मदाह, बावजूद, अंतहीन, प्रथम परिचय, जली रस्सी समेत अन्य उपन्यास लिखे।
इन कहानियों की रचना की
केवल पिता, धरातल, टापू पर अकेले, दूसरे चेहरे, सिलसिला, खंडित संवाद, नया संबंध, भूख, अभयदान, पुल टूटते हुए, विरोधी स्वर।