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नब्ज देखकर बता देते थे मर्ज, अब कराते हैं महंगे टेस्ट

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बलवाखेड़ी के वैद्य हृदयराम शर्मा का फ़ाइल फोटो - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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नब्ज देखकर बता देते थे मर्ज, अब कराते हैं महंगे टेस्ट
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मुजफ्फरनगर। वक्त के साथ चिकित्सा का तरीका भी बदल गया। पहले चिकित्सक और वैद्य नब्ज देखकर ही मर्ज बता देते थे, लेकिन अब हर बीमारी में महंगे टेस्ट कराए जाते हैं। चिकित्सा कार्य में आए इस बदलाव से जहां एक और उपचार में आसानी हुई, वहीं चिकित्सकों के पेशेवर हो जाने से मरीजों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ा है। डाक्टर्स डे की सीरीज में अमर उजाला ने चिकित्सा क्षेत्र में हुए बदलाव पर चिकित्सकों से बात की।
मशीनों से चिकित्सा में आए बड़े बदलाव: डा. एमएल गर्ग
मुजफ्फरनगर। पूर्व सीएमएस डा. एमएल गर्ग बताते हैं कि बीते तीन दशक से चिकित्सा कार्य में बड़े बदलाव आए हैं। अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन तथा अन्य पैथोलॉजी जांच से उपचार में फायदा हुआ है तथा मृत्यु दर में कमी आई है। वह बताते हैं कि करीब दो दशक पहले उपभोक्ता एक्ट लागू होने से मरीजों और चिकित्सकों के बीच की आत्मीयता कमजोर हुई है। कुछ चिकित्सक भी पेशेवर हो गए हैं। इसका एक कारण चिकित्सा की महंगी पढ़ाई एवं चिकित्सा कार्य में महंगी मशीनों का उपयोग होना भी है।
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‘पेशेवर अंदाज से बदनाम हो रहा पवित्र कार्य’
चरथावल। बलवाखेड़ी गांव के वैद्य हृदय राम शर्मा किसी परिचय के मोहताज नहीं थे। करीब 70 वर्षों तक उन्होंने नब्ज देखकर देशी दवाओं से मरीजों का उपचार किया। हसनपुर लुहारी गांव में उनकी दो पीढ़ी आयुर्वेद क्षेत्र में सेवाएं दे रही हैं। वैद्य हृदयराम शर्मा के पास दूसरे प्रांतों से भी लोग उपचार के लिए आते थे। उन्हें संस्कृत और ज्योतिष का भी खासा ज्ञान था। दोपहर तक आने वाले मरीजों को नब्ज देखकर बीमारी बता देते थे। ग्रामीण रामभूल पुंडीर और गोपीचंद बताते हैं मरीज क्या खाकर आया है, यह भी वह बता देते थे। उनकी चिकित्सा में सेवाभाव था। आज भी लोग उनका नाम सम्मान से लेते हैं। वर्ष 2003 में वैद्य जी के निधन के बाद उनके भतीजे डॉक्टर ओमपाल शर्मा ने उनकी विरासत संभाली। वह करीब 40 सालों से चिकित्सा सेवा कर रहे हैं। उनके बेटे विनय भारद्वाज भी दो दशक से हसनपुर लुहारी में इस क्षेत्र में जुड़े हैं। उनका कहना है ग्रामीण अंचल में अधिकांश झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार हो गई है। अधिकांश चिकित्सकों के पेशेवर अंदाज से यह पवित्र पेशा बदनाम हो रहा है। पहले सेवा भाव रहता था। बकौल डा. विनय रोग के जड़ से खात्मे को वह और पिता आज भी आयुर्वेदिक दवाओं का ज्यादा प्रयोग करते हैं।
आंख और त्वचा से पता लगती है बीमारी
खतौली। आयुर्वेद रत्न राजपाल पुंडीर कहते हैं कि चिकित्सा क्षेत्र में बड़े बदलाव हुए हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं है कि हर प्रकार की बीमारी में पैथोलॉजी टेस्ट कराने की जरूरत पड़े। वात, पित्त, गैस समेत अन्य कई बीमारियों को नाड़ी से पता लगा लिया जाता है। कुछ मरीजों की आंखों, त्वचा, आचार-विचार से भी बीमारी पता चल जाता है। मरीज के शरीर में उत्पन्न हो रही बड़ी बीमारी की जानकारी के लिए जरूरत पड़ने पर टेस्ट भी करा लिया जाता है, जिससे उसे सही समय पर सही उपचार मिल सके। वह वर्ष1968 से चिकित्सा सेवा से जुड़े हैं। वर्तमान में भूड़ क्षेत्र में जानसठ रोड पर बैठते हैं।
याद आते हैं ब्रह्मलीन वासुदेवानंद गिरि
भोपा। भोपा क्षेत्र के लोग आज भी ब्रह्मलीन वासुदेवानंद गिरि को याद करते हैं। उन्होंने भोकरहेड़ी कस्बे में 1963 में आनंद औषधालय की स्थापना की थी। मरीजों का आयुर्वेदिक पद्धति के उपचार किया जाता था। पूर्व चेयरमैन मदन पाल सिंह, रामकुमार शर्मा, रविंदर उर्फ काका पंडित बताते हैं कि वासुदेव नंद महाराज के पास दूर-दूर से मरीज उपचार के लिए आते थे। उनके ब्रह्मलीन होने के बाद रामचेतन महाराज, प्रणवानंद महाराज नेे औषधालय का संचालन जारी रखा, लेकिन उनके बाद यह औषधालय बंद हो गया।
अब तो छोटी बीमारी में भी होने लगी बड़ी जांच
भोपा। चौरावाला निवासी हकीम खूबचंद शर्मा का कहना है कि अब छोटी बीमारी की बड़ी-बड़ी जांच होने लगी हैं, जिससे मरीज के सामने आर्थिक परेशानी भी खड़ी हो जाती है। 80 वर्षीय खूबचंद शर्मा क्षेत्र के हकीमों में से एक हैं। वह आज भी मरीज की नब्ज पकड़कर बीमारी बता देते हैं और मरीज का थोड़ी बूटियों से सरल तरीके से इलाज करते हैं। वह बताते हैं कि इंसान को शुरू से ही अपने खाने पीने का ध्यान रखना चाहिए। संयमित खानॎपान बीमारियों को दूर रखता है।
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नाड़ी जाल से कई रोगों की होती है जानकारी
खतौली। आयुर्वेद रतन डाक्टर राजपाल पुंडीर वर्ष 1968 से मरीजों का उपचार कर रहे हैं। वह नाड़ी जाल से ही बीमारी का पता लगाकर उपचार करते है। उनका कहना है कि वाद, पित्त, गैस समेत अन्य कई बीमारियों को नाड़ी से पता लगा लिया जाता है। कुछ मरीजों के आंखों, त्वचा, आचार विचार से भी बीमारी पता चल जाता है। मरीज के शरीर में उत्पन्न हो रही बड़ी बीमारी की जानकारी के लिए जरूरत पड़ने पर टेस्ट भी करा लिया जाता है, जिससे उसे सही समय पर सही उपचार मिल सके।

वैद्य हृदयराम शर्मा के भतीजे डॉ. ओमपाल शर्मा- फोटो : MUZAFFARNAGAR

वैद्य हृदय राम शर्मा के पौत्र डॉ. विनय भारद्वाज- फोटो : MUZAFFARNAGAR

औषधालय के निर्माण कर्ता वासु देवानंद गिरी महाराज की प्रतिमा के पास खड़े महंत माधवानंद महाराज।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

भोकरहेडी के औषधालय में रखे आर्युवेदिक साहित्य।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

वैद्य खूबचंद शर्मा।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

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