मुजफ्फरनगर। वर्ष 2009 में समाज कल्याण विभाग में करोड़ों का घोटाला उजागर करने वाले तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी रिंकू सिंह राही का कहना है कि 1998 से लेकर 2012 तक की जांच की जाए तो मुजफ्फरनगर के समाज कल्याण विभाग में एक हजार करोड़ का घोटाला सामने आएगा। दुर्भाग्य है कि घोटाला कर करोड़ों डकारने वाले अपने गृह जनपदों में नौकरी कर रहे हैं, उनसे घोटाले के पैसे की रिकवरी तक नहीं हुई।
हापुड़ आईएएस-पीसीएस कोचिंग सेंटर के इंचार्ज रिंकू सिंह राही जिला समाज कल्याण अधिकारी रहते हुए मुजफ्फरनगर में मार्च 2009 में प्रतिपूर्ति शुल्क, छात्रवृत्ति, पेंशन, शादी-विवाह के अनुदान में हुए करोड़ों के घोटाले को उजागर कर चुके हैं। अफसरों-नेताओं और माफिया के गठजोड़ ने 26 मार्च 2009 को उन पर उस समय हमला किया, जब वह अपने निवास के बाहर बैडमिंटन खेल रहे थे। शुक्र यह था कि उनकी जान बच गई। हालांकि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनका जोश आज भी देखते ही बनता है। वह कहते हैं कि सिस्टम इतना लचर है कि घोटाले के मास्टरमाइंड अपने गृह जनपदों में नौकरी कर रहे हैं। घोटाले में सस्पेंड हुआ लिपिक 2012 में बहाल होने के बाद शामली पोस्टिंग पर चला गया और अब मुजफ्फरनगर में ही नौकरी कर रहा है।
पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड अकाउंटेंट जेल से आने के बाद अपने ही जिले लखनऊ में नौकरी कर रहा है। 50 करोड़ का घोटाला तो उनके सामने ही हुआ, जिसे उन्होंने पकड़ा था। यदि सरकार और विभाग उस समय कार्रवाई करते तो 2012 में अनिल वर्मा 20 करोड़ का घोटाला न करता। 1998 से 2012 तक की जांच की जाए तो एक हजार करोड़ का घोटाला सामने आएगा। घोटाले की जांच के लिए जितनी भी समिति बनी किसी ने उनसे पूछताछ नहीं की, जबकि मेरे पास सारे सबूत थे। मुझ पर दो बार हमला हुआ, उस हमले में मैं खुद गवाह नहीं हूं। पूरा खेल बड़े स्तर पर हुआ है। एसआईटी ने भी अभी तक मुझसे कोई पूछताछ नहीं की है।
ट्रेजरी के रिकार्ड से खुल जाएगा घोटाला
रिंकू सिंह राही कहते हैं कि अभी तक घोटाला खोलने की कोशिश ही नहीं की गई। ट्रेजरी से जो चेक बने होंगे, वे किन खातों में जमा हुए हैं, यदि यह निकाल लिया जाए, जो कि बहुत ही आसान है, पूरा घोटाला सामने आ जाएगा। जांच समितियों को यह बात बताई पर सुनी किसी ने नहीं।
पेंशन में प्रतिवर्ष 10.40 करोड़ का घोटाला
रिंकू सिंह राही ने बताया कि 2008-09 में एक वर्ष में पेंशन में दस करोड़ 40 लाख का घोटाला होता था। 62 हजार 467 लोगों की पेंशन जारी हो रही थी, विभाग के पास सूची केवल 28 हजार की थी, डाकखाने में सेटिंग के माध्यम से खेल हो रहा था।