मुजफ्फरनगर। सचिन की मौत के बाद उसके परिजनों का बुरा हाल है। सचिन के पिता बिशन सिंह और मां मुनेश देवी के आंसू दो साल बाद भी सूख नहीं पा रहे हैं।
सचिन को मौत ने छीन लिया। बहू स्वाति छोड़कर चली गई। सचिन की निशानी पोता गगन भी उनके पास नहीं है। पोते को देखने के लिए दादा-दादी की आंखें तरस गई हैं। शासन से मिले 12 लाख के मुआवजे में से एक पाई भी सचिन के परिजनों को नहीं मिली।
ममेरे भाइयों गौरव और सचिन की मौत के बाद पीड़ित परिवार इस गम से नहीं उबर सका है। दो साल बाद भी इनके घर खुशियां नहीं लौटी हैं। सचिन के पिता बिशन सिंह बताते हैं कि कुदरत ने उनसे सब कुछ छीन लिया। अब जिंदगी में कुछ नहीं बचा।
परिजनों और रिश्तेदारों ने बहू स्वाति की देवर राहुल के साथ जिंदगी की डोर बांधनी चाही, लेकिन यह कोशिशें परवान नहीं चढ़ सकीं। बेटे की मौत के बाद शासन ने बहू स्वाति को कलक्ट्रेट में सरकारी नौकरी और 12 लाख रुपये आर्थिक मदद के लिए दिए थे।
मगर सचिन की मौत के एक माह बाद ही बहू पोते गगन को अपने साथ लेकर मायके चली गई, जो फिर लौटकर नहीं आई। शासन से मिली धनराशि भी बहू के नाम थी, इसलिए यह रकम भी वही ले गई। अब बिशन सिंह और मुनेश देवी को बेटी रीतू की शादी की चिंता साल रही है।
पुण्यतिथि पर बहू को बुलावा
सचिन और गौरव की दूसरी पुण्यतिथि शुक्रवार 28 अगस्त को मलिकपुरा गांव में मनाई जाएगी। पुण्यतिथि पर सुबह यज्ञ-हवन के बाद शोक सभा होगी। सचिन के पिता बिशन सिंह ने बताया कि पुण्यतिथि पर बहू स्वाति को भी पोते गगन के साथ बुलवाया है, ताकि वो पुण्यतिथि हवन में शामिल हो सके।
इसके लिए उन्होंने पुरबालियान में स्वाति के पिता देवेंद्र बालियान से आग्रह किया है कि वो स्वाति और गगन को मलिकपुरा भेज दें। उल्लेखनीय है कि सचिन की पहली पुण्यतिथि पर भी स्वाति मलिकपुरा नहीं आई थी। रिश्तेदारों के काफी कहने पर मायके वाले मासूम गगन को लेकर मलिकपुरा पहुंचे थे। सचिन की मां मुनेश देवी ने रोते हुए कहा कि गगन ही सचिन की आखिरी निशानी है, उसे हम देखना चाहते हैं।
गौरव के परिजनों ने भी गांव छोड़ा
गौरव की मौत के बाद उसके परिजनों ने मलिकपुरा गांव छोड़ दिया। शासन ने गौरव की बहन शैली को डायट में नौकरी दी। बेटी की नौकरी के लिए पिता रविंद्र सिंह और मां सुरेश गांव छोड़कर शहर में आ गए। वो अब शहर में ही रह रहे हैं। खेतीबाड़ी के काम के लिए ही वह गांव मलिकपुरा जाते हैं।