उप्र राज्य सड़क परिवहन निगम रोडवेज डिपो के चालकों से भेदभाव कर रहा है। मेरठ क्षेत्र के चालकों को एनसीआर का लाभ दिया जा रहा है। जबकि यहां के चालकों को इससे दूर रखा जा रहा है। इससे कर्मचारी संगठनों और चालकों में रोष बना है। कर्मचारी संयुक्त परिषद ने अधिकारियों को इस संबंध में शिकायत दी है, जिसके बाद मुख्यालय को प्रपोजल भेजा गया है।
परिवहन निगम के द्वारा मेरठ रोडवेज डिपो के संविदा चालकों को 1.26 रुपये के बजाए सीधे 2 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से वेतन भुगतान किया जा रहा है। यह सब एनसीआर क्षेत्र में शामिल होने के कारण मिल रहा है। चूंकि दिल्ली में भी संविदा चालकों को इसी तरह भुगतान किया जा रहा है। मेरठ के साथ ही मुजफ्फरनगर भी नेशनल कैपिटल रीजन (एनसीआर) में शामिल है। जिसके तहत रोडवेज में एनसीआर की तर्ज पर चालकों का भुगतान होना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।
डिपो में संविदा पर 217 चालक हैं। जिन्हें निगम की ओर से 1.26 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से हर माह वेतन भुगतान होता है। रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद का कहना है कि जनपद एनसीआर में होने के बावजूद भी चालकों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। संगठन मंत्री अनुज त्यागी ने बताया कि डिपो के चालकों को एनसीआर की तर्ज पर वेतन नहीं दिया जा रहा है। इस मामले में आरएम समेत उच्चाधिकारियों को पत्र सौंपा गया, उसके बाद क्षेत्रीय प्रबंधक कार्यालय की ओर से मुख्यालय को प्रपोजल भेजा गया है। डिपो के सभी चालकों का ब्यौरा बनाया गया है। ताकि अधिकारियों के डिमांड करते ही पूरी रिकार्ड सौंपा जा सके। संगठन चालकों के साथ हो रहे भेदभाव को बर्दाश्त नहीं करेगा।