मुजफ्फरनगर की टूटी सड़कों से होकर गुजरते कांवड़िए।
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कांवड़ियों का सैलाब उमड़ना शुरू हो चुका है। राष्ट्रीय राजमार्ग कांवड़ियों के बम-बम भोले के जयघोष से गुंजायमान हो रहा है। इस बार भोलों को सिस्टम की यातनाएं झेलनी पड़ रही हैं। इस बार कांवड़ियों को टूटी सड़कों और कंकरों के ऊपर से होकर गुजरना पड़ रहा है। मार्ग पर खराब पड़े हैंडपंप का रिबोर तक नहीं हो पाया है। चिकित्सा के लिए गठित टीमें भी सक्रिय नहीं हैं।
कांवड़ यात्रा को लेकर प्रतिवर्ष युद्घस्तर पर तैयारियां होती थी। सभी विभाग अलर्ट रहते थे। इस बार कांवड़ यात्रा का महा सैलाब शुरू हो चुका है। सड़कों की हालत बेहद खराब है, जो सड़कें टूटी थी उनकी मरम्मत नहीं हो पाई। कई जगहों पर कांवड़ियों को कंकरों के ऊपर से होकर गुजरना पड़ रहा है।
कांवड़ यात्रा की जिस तरह मॉनीटरिंग की जानी चाहिए थी, वह नहीं हो पाई। कांवड़ यात्रा मार्ग पर पड़ने वाले सभी हैंडपंपों की प्रतिवर्ष जांच होती थी। खराब हैंडपंपों को रिबोर किया जाता था और जहां ज्यादा आवश्यकता थी, वहां नया हैंडपंप लगाया जाता था।
इस बार न तो कोई हैंडपंप रिबोर हुआ है और न ही कोई नया हैंडपंप आवश्यकता को देखते हुए लगाया गया। एक्सईएन जल निगम केबी जैन के अनुसार इसके लिए उनके पास कोई बजट नहीं है। दूसरी तरफ चिकित्सा विभाग जिस तरह अलर्ट दिखाई देना चाहिए, ऐसा कुछ कांवड़ मार्ग पर दिखाई नहीं दे रहा है।
चिकित्सा शिविरों में डॉक्टर नजर नहीं आ रहे हैं। हालांकि सीएमओ डॉ सुबोध कुमार का दावा है कि मुख्य मार्ग पर पड़ने वाली 14 पीएचसी पर डॉक्टरों को अलर्ट कर दिया गया है। शिवचौक पर 24 घंटे चिकित्सा शिविर चलाया गया है। कांवड़ मार्गों पर 45 शिविर अलग से लगाए गए हैं। 43 एंबुलेंस कांवड़ मार्ग पर अलग-अलग स्थानों पर तैनात की गई हैं।