मुजफ्फरनगर। मीरापुर की जीत से एनडीए में रालोद का वजूद बढ़ेगा। लोकसभा चुनाव में बागपत और बिजनौर में जीत और अब उपचुनाव में हिस्से में आई अकेली सीट पर रालोद को कामयाबी मिली है। 2027 के लिए जीत के कई मायने है। पश्चिम यूपी में सीटों पर रालोद की दावेदारी और हिस्सेदारी बढ़ने का अनुमान भी लगाया जा रहा है।
वर्ष 2022 का विधानसभा चुनाव रालोद ने सपा गठबंधन के साथ मिलकर लड़ा और बड़ी कामयाबी हासिल की थी। लेकिन लोकसभा चुनाव से पहले रालोद ने सपा का साथ छोड़कर भाजपा के लिए सियासत का ताना बना बुना। सीटों के बंटवाने में सिर्फ बागपत और बिजनौर मिली, लेकिन दोनों जगह जीत से रालोद को गठबंधन में मजबूती मिली।
उपचुनाव में सीटों का बंटवारा शुरु हुआ तो रालोद ने मीरापुर और खैर सीट पर दावेदारी की थी। लेकिन मीरापुर ही रालोद के खाते में आई। करीब 30 हजार वोटों से मिथलेश पाल को मिली जीत ने विधानसभा में रालोद की संख्या बरकरार रखी है।