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तीर्थनगरी के जंगलों में टहलेंगे गैंडे 

Sat, 13 May 2017 11:52 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
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भारतीय वन्य जीव गैंडा। - फोटो : amar ujala
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मुजफ्फरनगर। तीर्थनगरी शुक्रताल के जंगली इलाकों में गैंडे पलेंगे। शुक्रताल की हैदरपुर झील गैंडे के रहने-सहने और खान-पान के लिए उपयुक्त पाई गई है। गैंडे को फिर से बसाने के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक की टीम ने वन्य जीव विहार हस्तिनापुर का जायजा लिया। 16 मई को शुक्रताल में विभागीय अफसरों की मीटिंग बुलाई गई है।
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देश में विलुप्त होने के कगार पर पहुंच रहे गैंडे को फिर से बसाने के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक लखनऊ की ओर से मुख्य वन संरक्षक पश्चिमी उत्तर प्रदेश मुकेश कुमार के निर्देशन में टीम गठित की है। गैंडे के संरक्षण के लिए डब्लूडब्लूएफ के अधिकारी आशीष बिष्टा के साथ हस्तिनापुर वन्य सेंचुरी का दो बार दौरा कर चुके हैं। प्रोजेक्ट पर पिछले कई माह से काम चल रहा है। अभी तक वन्य जीव सेंचुरी हस्तिनापुर क्षेत्र में ऐसा विशालकाय पशु नहीं था, जबकि सेंचुरी के आसपास पानी, दलदली जमीन और प्रचुर मात्रा में जीवों के लिए भोजन उपलब्ध है। इसको देखते हुए सेंचुरी का इलाका छाना गया। सर्वे में जनपद के शुक्रताल क्षेत्र की हैदरपुर झील गैंडे के जीवन के लिए उचित पाई गई है। यहां गैंडे के लिए दलदली जमीन, पर्याप्त पानी और प्रचुर मात्रा में घास है। जल्द ही शुक्रताल तीर्थनगरी के क्षेत्र में अब गैंडे का वास शुरू हो जाएगा। इसको लेकर प्रधान वन संरक्षक एवं वन्य जीव कार्यालय के आला अधिकारियों ने रूपरेखा तैयार कर ली है। वेस्ट जोन के मुख्य वन संरक्षक मुकेश कुमार ने बताया कि शुक्रताल क्षेत्र की हैदरपुर झील के निकट गैंडे की पुनर्स्थापना की संभावनाएं तलाशी गई हैं। गैंडे के लिए यह क्षेत्र पर्याप्त मिला है। 16 मई को शुक्रताल में मीटिंग कर प्रोजेक्ट को फाइनल रूप दिया जाएगा।                      

मंगलवार को अफसर करेंगे मंथन                         
मुजफ्फरनगर। लखनऊ के आला अधिकारियों के निर्देश पर गैंडे की पुनर्स्थापना के लिए अलग से टीम बनाई गई है। जिसमें वन संरक्षक मेरठ, सहारनपुर, डीएफओ मुजफ्फरनगर, बिजनौर, डब्ल्यूडब्ल्यूआई के वैज्ञानिक डॉ सम्राट, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अमित शर्मा, डॉ मुदित गुप्ता रखे गए हैं। मंगलवार को शुक्रताल में ही यह टीम मीटिंग कर गैंडे की पुनर्स्थापना के लिए विस्तृत रूपरेखा तैयार करेगी।      
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झील पर प्रतिबंध  लगाने के निर्देश                        
मुजफ्फरनगर। आला अधिकारियों ने शुक्रवार को निरीक्षण कर हैदरपुर झील की बारीकियों को परखा। यहां फालतू रूप से घूम रहे घोड़े, भेड़, भैंसे आदि जानवरों को खदेड़ा गया। इसके बाद मुख्य वन संरक्षक मेरठ ने जनपद के डीएफओ सूरज को बाहरी जानवरों के झील और आसपास क्षेत्रों में प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए हैं, ताकि यहां पर्याप्त रूप से जम सके।      
                  
गैंडे पर एक नजर                        
गैंडा भारत के अलावा नेपाल, इंडो चाइना आदि क्षेत्र में भी पाया जाता है। एक सींग वाला गैंडा विश्व का चौथा सबसे जलचर जीव है, जिसे राइनोसरस भी कहते हैं।                         
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