बायोमेट्रिक मशीन में फर्जीवाड़ा कर जिले के नगरीय क्षेत्रों में 64 आधार कार्ड नंबरों को 19,795 बार प्रयोग करने के मामले में सात थानों में मुकदमे दर्ज हो गए हैं। राशन वितरण प्रणाली के डाटा बेस से छेड़छाड़ कर करोड़ों के खाद्यान्न की हेराफेरी की गई है। अभी तक की जांच में 90 राशन विक्रेता इस घोटाले में सामने आए हैं, जिनमें 80 केवल मुजफ्फरनगर शहर के हैं। प्रदेश के खाद्य एवं रसद आयुक्त आलोक कुमार के आदेश पर पूर्ति निरीक्षकों की ओर से सभी 64 आधार कार्ड धारकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए गए हैं।
राशन के कोटे में गोलमाल का धंधा पुराना है। जनपद में सस्ते गल्ले की दुकानों पर राशन वितरण में गड़बड़ी से अधिकारियों के होश उड़ गए हैं। यह ई-पॉस मशीन में हुए फर्जीवाड़े से फिर साबित हो गया है। शासन ने गरीबों तक खाद्यान्न सामग्री को व्यवस्थित तरीके से आपूर्ति को बायोमेट्रिक मशीनों की योजना लागू की थी। जिले के नगरीय क्षेत्रों में 177 राशन की दुकानें हैं। शहरी क्षेत्र में जिनकी संख्या 117 है। ई-पॉस मशीनों से आधार नंबर को लिंक कर उपभोक्ता को प्रतिमाह राशन मिलना था, मगर राशन विक्रेताओं ने यहां भी खेल कर दिया।
64 आधार कार्ड नंबरों का फर्जी तरीके से इस्तेमाल कर 19,795 बार गरीबों के हिस्से का अनाज, चावल, चीनी और केरोसिन का तेल डकार लिया। शासन की जांच रिपोर्ट में सूबे के 43 जिलों में ऐसा ही गड़बड़झाला सामने आया है। मुजफ्फरनगर के फर्जीवाडे़ की बीते दो दिन में गहनता से खोजबीन हुई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। आधार कार्ड में हेराफेरी करने के आरोप में नगरीय क्षेत्रों के 90 राशन डीलर्स शामिल हैं, जिनमें से मुजफ्फरनगर शहर में अकेले 80 राशन विक्रेता घेरे में आए हैं।
बाकी नगर पंचायत मीरापुर, जानसठ, बुढ़ाना, सिसौली में राशन के कोटेदार हैं। खाद्य आयुक्त आलोक कुमार के निर्देश पर पूर्ति निरीक्षकों ने अपने क्षेत्र के थानों में 64 आधार कार्ड धारकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए हैं। जिन थानों में मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उनमें शहर कोतवाली, नईमंडी कोतवाली, सिविल लाइन, बुढ़ाना कोतवाली, भौराकलां, मीरापुर और जानसठ कोतवाली शामिल हैं। मुकदमा दर्ज किए जाने की कार्रवाई से कोटेदारों में हड़कंप मच गया है।
पहली एफआईआर में क्यों बचे कोटेदार
मुजफ्फरनगर। डीएम राजीव शर्मा ने मामले में डीएसओ से वार्ता की। इसके बाद संबंधित पूर्ति निरीक्षकों की ओर से मुकदमे दर्ज कराये गए, लेकिन राशन डीलर्स के विरुद्ध मुकदमा नहीं लिखाने पर सवाल उठ रहे हैं। जांच में फंसे अन्य जिलों में राशन विक्रेताओं के खिलाफ ही एफआईआर हुई है। प्रशासन ने जिले में 64 आधार कार्ड धारकों के विरुद्ध ही मुकदमा दर्ज क्यों कराया है।
राशन विक्रेताओं से होगी वसूली
मुजफ्फरनगर। सरकारी खाद्यान्न में सेंधमारी कर करोड़ों की राशन लूट के दोषी डीलर्स के खिलाफ भी खाद्य एवं रसद आयुक्त ने सख्ती के तेवर दिखाए हैं। डीएसओ को जांच कर दोषी कोटेदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने और हेराफेरी कर हजम किए गए राशन का पैसा वसूलने के आदेश भी दिए हैं।
बायोमेट्रिक मशीनों में छेड़छाड़ कर 64 आधार कार्ड नंबरों से 19795 बार राशन का आहरण किया गया है। शासन की जांच में अनियमितता की पुष्टि के बाद जिला स्तर पर गहनता से जांच शुरू कर दी गई है। प्रथम दृष्टया दोषी 64 आधार कार्ड धारकों के विरुद्ध डीएम के आदेश पर जिले के सात थानों में पूर्ति निरीक्षकों की ओर से मुकदमे दर्ज करा दिए गए हैं - सुनील कुमार पुष्कर, जिला पूर्ति अधिकारी।