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Muzaffarnagar News: महक, दस्तक की आस और जिक्र का विमोचन

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मुजफ्फरनगर। हिंदी उर्दू संस्था समर्पण की ओर से रचनात्मक मासिक गोष्ठी का आयोजन तहसील परिसर में अध्यक्ष ईश्वर दयाल गुप्ता गीतकार के सौजन्य से हुआ। शमीम किरतपुरी की पुस्तक महक, प्रकाश सूना की पुस्तक दस्तक की आस और सुनीता सोलंकी की पुस्तक जिक्र का विमोचन किया गया।
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शुभारंभ समीर कुलश्रेष्ठ की सरस्वती वंदना और हाजी सलामत राही के नात-ए-पाक से हुआ। ईश्वर दयाल गुप्ता की रचना

चुन-चुन के मारेंगे, घर में घुसकर मारेंगे, अगर तुम प्यार बांटोगे जमाना याद रखेगा से वाहवाही लूटी।
प्रकाश सूना के शेर, परिंदों से कहता हूं उठो उड़ जाओ पिंजरों से, ये दीगर बात है पहले वो उनके पर कतरता है। अब्दुल हक सहर ने सुनाया कि आरज़ू थी शादमानी के नज़ारे आएंगे, चंद लम्हों में भयानक हादसा देखा गया। नाहिद समर काविश के शेर, छत पर दिखाई देगा कि दीवार की तरफ, आंखें लगी हैं कूचाए दिलदार की तरफ को सराहा गया।
शमीम किरतपुरी, संतोष फलक, प्रीतम सिंह शामली, योगेंद्र सोम, अनिल धीमान, समीर कुलश्रेष्ठ, शकील अहमद, डाॅ. आस मोहम्मद अमीन, सुनीता सोलंकी ने रचनाएं पढ़ीं। इस मौके पर शकील अहमद एडवोकेट, मास्टर शहजाद राणा, खुर्शीद अहमद, अफजल बादल, जुनैद अजहर अली रज़ा मौजूद रहे। संचालन अमीन आस मोहम्मद ने किया।
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