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Muzaffarnagar News: एक के बाद एक तीन फांसी की सजा का रिकॉर्ड

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मुजफ्फरनगर। न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश/त्वरित न्यायालय, कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने 55 दिन में मृत्युदंड की तीसरा फैसला सुनाया। न्याय पथ पर इंसाफ का यह नया अध्याय जुड़ा है। मृत्युदंड के फैसले पहले कभी-कभार ही हुए हैं। अदालत ने कम समय में नया कीर्तिमान बनाया है।
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पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने इससे पहले ज्ञानवापी मामले में दिए गए ऐतिहासिक निर्णय से देशभर में चर्चा में आ गए थे।
वाराणसी में ज्ञानवापी परिसर में श्रृंगार गौरी के दैनिक दर्शन-पूजन करने एवं देवी-देवताओं के विग्रह सुरक्षित करने वाली अर्जी पर रवि कुमार दिवाकर ने मई 2022 को एडवोकेट कमीशन की कार्रवाई का निर्देश दिए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मुहर लगाई। इसके बाद उन्हें पत्र एवं कॉल के जरिए धमकियां मिलीं। 20 जून 2023 को स्थानांतरण बरेली हो गया। वहां दो बार तैनाती उन्हें एवं उनके परिवार को दो बार इंटरनेशनल कॉल पर धमकियां दी गईं। वर्तमान में उनकी तैनाती मुजफ्फरनगर में है।

फांसी की सजा-1

हरसौली गांव में 25 फरवरी 2010 को वॉलीबाल खेलने को लेकर विवाद हो गया था। दूसरे पक्ष के लोगों ने घर पर हमला कर नसीम की हत्या कर दी। अदालत ने 20 नवंबर 2018 को सात दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी।
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फांसी की सजा-2

जानसठ क्षेत्र के गांव में 12 जून 2022 को मासूम बच्चे के यौन उत्पीड़न का मामला हुआ। दो फरवरी 2023 को दोषी सोनी को फांसी और दूसरे दोषी राजीव को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।



फांसी की सजा-3

एडवोकेट समीर सैफी की हत्या के मामले में अप्रैल 2026 में ही अदालत ने तीन दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। एक दोषी को सात साल कैद की सजा सुनाई गई है। इससे पहले अदालत ने दोष सिद्ध कर शनिवार को ही चारों को जिला कारागार भेजा था।

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फांसी की सजा-4

खेडृी सूंडियान के शेखर की 17 जून 2019 को हत्या की गई। इस प्रकरण में 28 अप्रैल को अदालत ने मां और उसके तीन बेटों को फांसी की सजा सुनाई।



फांसी की सजा-5

फहीमपुर कांड सिखेड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले फहीमपुर गांव की चर्चित और सनसनीखेज आपराधिक घटना है। एक दिसंबर 2000 को हुए 8 लोगों के सामूहिक हत्या कर दी गई। दो आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई गई थी
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