राशन वितरण गड़बड़झाले में अपने खिलाफ कार्रवाई से पहले ही राशन डीलर सतर्क हो गए हैं। राशन वितरकों ने घोटाले के लिए अफसरों और कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराया है। कलक्ट्रेट में प्रदर्शन कर प्रमुख सचिव खाद्य एवं आपूर्ति लखनऊ को संबोधित ज्ञापन एडीएम को दिया।
ज्ञापन में बताया कि राशन कार्ड बनाने एवं वितरित करने का काम आपूर्ति विभाग करता है।
आपूर्ति विभाग एवं पर्यवेक्षक की देखरेख में डीलर ने राशन वितरण करते है। अभिलेखों पर सरकारी पर्यवेक्षक के हस्ताक्षर भी होते हैं। ई-पॉस मशीन एनआईसी लखनऊ द्वारा नियंत्रित एवं ऑपरेट होती है। ई-पॉस मशीन का गुप्त कोड आपूर्ति निरीक्षक के पास होता है। प्रत्येक माह सप्लाई इंस्पेक्टर मशीन को पासवर्ड डालकर प्रारंभ करते हैं और राशन वितरण के बाद मशीन को बंद कर चले जाते हैं। पूर्ति निरीक्षक के बिना पासवर्ड डाले राशन वितरण नहीं हो सकता।
राजपत्रित अधिकारियों द्वारा राशन कार्डों का सत्यापन होता है। बोगस राशन कार्ड पाए जाने पर उन्हें रद्द कर दिया जाता है। प्रत्येक माह चार तारीख को राशन डीलर को राशन वितरण करने के लिए सूची दी जाती है। विभाग की सूची के आधार पर ही राशन वितरित होता है। डीलर की कोई भूमिका राशन कार्ड बनाने से लेकर ई-पॉस मशीनों के संचालन तक में नहीं है। अब जब फर्जीवाडा पकड़ा गया है तो मुकदमे दर्ज कराने और लाइसेंस निरस्त करने की बात की जा रही है।
पूरे फर्जीवाडे़ के लिए अधिकारी, कर्मचारी और डाटा ऑपरेटर जिम्मेदार हैं, इन्हीं के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। ज्ञापन देने वालों में उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन, सस्ता गल्ला विक्रेता परिषद के कृष्ण गोपाल मित्तल, राकेश त्यागी, जयपाल सिंह, जितेंद्र कुमार, अनिल जैन, मंजू माहेश्वरी, किरणपाल, राम अवतार, अनंत कुमार, सदाकत अली, संजीव कुमार, नेहा गोयल, सत्यवीर सिंह, सत्यपाल, राजू मचल, श्यामलता, संजय, प्रमोद स्नेही, श्यामलाल, आत्माराम, नीरज गुप्ता, कंवरपाल, अरुण शर्मा, विजय सिंह, हारुण, किरणवती, नितिन कुमार, प्रवीण जैन आदि रहे।