मुजफ्फरनगर। जिले की सियासत के पुराने दिग्गजों में शामिल पूर्व मंत्री राजपाल सैनी फिर सपा में वापस लौट गए। तीन दशक से राजनीति में सक्रिय सैनी अपने बेटे शिवान सैनी के लिए मीरापुर विधानसभा के टिकट के जोर आजमाइश करते नजर आएंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा में वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वह हकदार थे।
बुढ़ाना क्षेत्र के लुहसाना गांव निवासी राजपाल सैनी ने 28 साल बिजली विभाग में नौकरी की। राजनीति में वह 1996 में ही सक्रिय होने शुरू हो गए थे और शुरूआत में जनता दल से जुड़ गए। वर्ष 1998 में नौकरी से छोड़कर राजनीति शुरू की। पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव ने जनता दल से अलग होकर सपा का गठन किया तो राजपाल सैनी भी उनके साथ चले गए थे।
सपा में टिकट नहीं मिलने पर वह बसपा में शामिल हुए और यहीं से लंबे समय तक राजनीति की। बसपा सरकार में वह राज्य के खाद बीज निगम का चेयरमैन भी रहे। बेटे शिवान सैनी को खतौली से चुनाव लड़ा चुके हैं। नए परिसीमन के बाद अब वह मीरापुर से अपने बेटे के टिकट की पैरवी करेंगे।
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मोरना सीट से चुने गए थे विधायक
मुजफ्फरनगर। वर्ष 1999 में बसपा के टिकट पर मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से पहला चुनाव लड़ा और तीसरे स्थान पर रहे थे। बसपा के टिकट पर ही वर्ष 2002 में मोरना विधानसभा सीट से 40579 वोट हासिल कर सपा के संजय चौहान को हराकर पहली बार विधानसभा पहुंचे। वर्ष 2007 के चुनाव में रालोद के टिकट पर चुनाव लड़े कादिर राना के सामने राजपाल सैनी को हार का सामना करना पड़ा लेकिन बसपा के कोटे से राज्यसभा सदस्य बनाए गए। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में बेटे शिवान सैनी को बसपा के टिकट पर खतौली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाया लेकिन तीसरे स्थान पर रहे। विधानसभा चुनाव 2022 से पहले उन्होंने बसपा छोड़कर सपा का दामन थाम लिया था और गठबंधन में रालोद के टिकट पर खतौली से चुनाव लड़े। साल 2023 में वह भाजपा में शामिल हो गए थे लेकिन यहां बात नहीं बनी। ब्यूरो
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हरेंद्र मलिक की मौजूदगी में हुए शामिल
मुजफ्फरनगर। सपा जिलाध्यक्ष जिया चौधरी एडवोकेट ने बताया कि लखनऊ में सदस्यता ग्रहण कराने के दौरान सांसद हरेंद्र मलिक भी मौजूद रहे। राजपाल सैनी के अलावा बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष कमल गौतम और नंद किशोर पुंडीर ने भी सपा का दामन थामा है। ब्यूरो