मुजफ्फरनगर/चरथावल। जिले के सरकारी अस्पतालों में दो महीने से रेबीज इंजेक्शन नहीं मिल पाने से मरीजों को बैरंग लौटना पड़ रहा है। जिले में कुत्ता अथवा बंदर काटने वाले मरीज निजी डाक्टरों से महंगे इंजेक्शन लगवाने को मजबूर हैं। कोविड से पहले जिला चिकित्सालय में एक दिन में औसतन 75 से 80 मरीज रेबीज का इंजेक्शन लगवाने पहुंचते थे।
कुत्ता, बंदर, नेवला, घोड़ा, बिल्ली और चूहे आदि के काटने से मरीजों को रेबीज से बचने के लिए इंजेक्शन लगवाने का कोर्स करना पड़ता है। शासन से सरकारी अस्पतालों में रोगी को रेबीज की नियमित टीका लगवाने की व्यवस्था की हुई है। कोरोना काल में जिले में रेबीज की किल्लत के कारण मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। स्वामी कल्याणदेव राजकीय चिकित्सालय में रेबीज के इंजेक्शन दो महीने से नहीं है। जिससे सैकड़ों मरीज रोजाना अस्पतालों से बिना इंजेक्शन के लौट रहे हैं। उन्हें करीब 300 से 400 रुपये खर्च कर निजी इंजेक्शन लगवाने पड़ रहे हैं।
बिरालसी में रोडवेज परिचालक प्रवीण, सीमा, काला आदि दर्जनों लोग बंदरों के हमले से घायल हो चुके हैं, लेकिन उन्होंने निजी तौर पर इलाज कराना पड़ा। उधर, चरथावल सीएचसी प्रभारी डॉ. सतीश कुमार ने बताया कि केंद्र पर सोमवार, बुधवार और शुक्रवार का दिन नियत है। पांच इंजेक्शन का रेबीज का कोर्स होता है। पिछले डेढ़ महीने से रेबीज की वैक्सीन खत्म हैं। ज्यादातर मरीज कुत्ता काटने वाले ही आते है। यहां एक हफ्ते में औसतन 40 से 45 मरीज इंजेक्शन लगवाने आते हैं।
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वर्जन
कोविड में जिले में रेबीज के इंजेक्शन खत्म है। इसके लिए शासन को पत्र भेजा गया है। शासन से मिलने के बाद जल्द ही जिले के सरकारी अस्पतालों में रेबीज के इंजेक्शन उपलब्ध कराएं जाएंगे। - डॉ. प्रवीण चोपड़ा जिला मुख्य चिकित्साधिकारी