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सरकारी केंद्रों पर एक  भी दाने की खरीद नहीं हुई, व्यापारियों को दोगुने दामों पर बेच रहे किसान       

Thu, 12 Oct 2017 12:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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सूना पड़ा सरकारी धान क्रय केंद्र। - फोटो : अमर उजाला
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जिले में सरकारी धान क्रय केंद्र सूने पड़े हैं। आठ केंद्रों में से एक केंद्र पर एक दाना खरीद भी नहीं हो पाई है। सरकार ने धान का मूल्य 1550 रुपये प्रति क्विंटल किया हुआ है, जिले के किसान अपना धान मंडी में व्यापारियों को 2600 से लेकर तीन हजार तक दे रहे हैं। कुछ किसान हरियाणा की करनाल मंडी में सीधे भी धान ले जा रहे हैं। जिले के किसान बासमती की उपज करते हैं, जिसका दाम और डिमांड ज्यादा है।  
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प्रदेश सरकार इस समय पूरे प्रदेश में धान की खरीद कर रही है। सरकार ने धान की खरीद का मूल्य 1550 और 1590 घोषित किया है। इसी रेट में किसानों से धान खरीदा जा रहा है। जिले में आठ क्रय केंद्र धान खरीद के लिए बनाए गए हैं। इनमें चार मार्केटिंग और चार पीसीएफ के हैं। एक केंद्र नवीन मंडी स्थल पर भी बनाया गया है। यह धान खरीद केंद्र सुनसान पड़ा है। खरीद केंद्र पर मिले आर्यन ने बताया कि अभी तक कोई किसान यहां नहीं आया है।

यहां मोटा धान नहीं बोया जाता, बासमती बोई जाती है, बाजार में बासमती का रेट दोगुना है। ऐसे में कोई सरकारी क्रय केंद्र पर क्यों देगा। इस संबंध में जिला खाद्य विपणन अधिकारी अजय टंडन से बात हुई तो उन्होंने बताया कि हमने आठ क्रय केंद्र खोले हैं, लेकिन अभी किसी भी केंद्र धान की खरीद शुरू नहीं हो पाई है। बाजार में धान का अधिक मूल्य होना ही इसका कारण है।  
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व्यापारियों के यहां लगी भीड़ 
मुजफ्फरनगर। नवीन मंडी स्थल पर व्यापारियों के यहां धान बेचने वाले किसानों की लाइन लगी है। व्यापारी धान की क्वालिटी के हिसाब से दाम दे रहा है। बासमती का रेट सामान्य रूप से 2600 से 2800 चल रहा है। व्यापारी नवीन कुमार का कहना है कि बाजार में रेट महंगा है, इसलिए सरकारी पर धान नहीं जाएगा। इस समय व्यापारियों के पास बड़ी मात्रा में धान आ रहा है।  

11 हजार हेक्टेयर में हुआ उत्पादन 
मुजफ्फरनगर। जिले में इस बार 11 हजार हेक्टेयर जमीन में धान का उत्पादन हुआ है। उपनिदेशक कृषि नरेंद्र कुमार ने बताया कि बीते वर्ष जिले में 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के हिसाब से उत्पादन हुआ था। इस बार वर्षा अच्छी हुई है, उत्पादन बढ़ सकता है। जनपद में 99 प्रतिशत किसान बासमती की ही उपज करता है। मोटा धान कोई अपने खाने के लिए लगा लेता हो तो अलग है, बेचने के लिए कोई नहीं लगाता। इस कारण सरकारी केंद्रों पर धान नहीं जा रहा है। सहारनपुर मंडल के जिलों में बासमती का ही उत्पादन होता है।  
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