लखनऊ में 15 साल से लटका नगरपालिक को नगर निगम बनाने का प्रस्ताव
मुजफ्फरनगर। शहर पालिका को नगर निगम बनाने की मांग को 15 साल बीत गए हैं। प्रस्ताव लखनऊ में लटका हुआ है, लेकिन अभी तक परवान नहीं चढ़ा। शहर की बढ़ती आबादी के साथ शहर के विकास के लिए नगर निगम की मांग उठती रही है। पालिका बोर्ड का प्रस्ताव भी कई बार शासन को गया है। चेयरमैन रहते हुए वर्तमान राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल ने भी 15 साल पहले शासन को बोर्ड की ओर से प्रस्ताव भिजवाया था। पालिका ने शासन को जो प्रस्ताव भेजा था। अग्रवाल ने निगम की मांग को लेकर सीएम योगी को पत्र दिया था।
शासन ने वर्तमान बोर्ड से नगर निगम के लिए प्रस्ताव मांगा था। वर्तमान बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव को हरी झंडी नहीं दी गई थी। चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल और सभासदों ने अपने कार्यकाल को पूरा करने की बात कही थी। शहर की सीमा से सटे गांव सरवट, बझेड़ी, नसीरपुर, पचैंडा कलां, मुस्तफाबाद, बिलासपुर, कूकड़ा, शेरनगर, अलमासपुर, बीबीपुर, सहावली, संधावली, वहलना, मीरापुर, सूजडू, मंधेड़ा, पीनना, शाहबुद्दीनपुर, मिमलाना, शेरपुर व बामनहेड़ी आदि गांवों को निगम में शामिल करने की मांग रखी गई थी।
आबादी के साथ बढ़ती गई वार्डों की संख्या
नगर पालिका का गठन वर्ष 1872 में हुआ था। शुरूआत में यहां 15 वार्ड थे। इसके बाद आबादी बढ़ती गई और वार्ड भी बढ़ते चले गए। 34 साल पहले शहर में 30 वार्ड थे, जो अब 50 हो गए हैं। शहर में शुरूआत में बहुत कम आबादी थी, लेकिन 2011 की जनगणना में यहां की आबादी 3.92 लाख पर पहुंच गई। अब आबादी करीब साढ़े चार लाख तक पहुंच गई है।
अब हमें कोई एतराज नहीं : अंजू अग्रवाल
चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल का कहना है कि हमारे बोर्ड का कार्यकाल पूरा होने को है। अब हमें नगर निगम का दर्जा दिए जाने से कोई एतराज नहीं है। हमने सिर्फ यह मांग रखी थी कि निर्वाचित बोर्ड को पूरा समय दिया जाए।
शासन को प्रस्ताव पहुंच चुका : कपिलदेव
प्रदेश के राज्यमंत्री और नगर विधायक कपिलदेव अग्रवाल का कहना है कि शासन को पहले से ही प्रस्ताव जा चुका है। विधायक बनने के बाद से उनके स्तर से निरंतर प्रयास किया जा रहा है। जल्द सफलता मिलेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस संबंध में बात हो चुकी है।