मुजफ्फरनगर। कोविड के दौरान महकमे के साफ्टवेयर की तकनीकी खामियों के कारण पूरे शैक्षिक सत्र में प्रोन्नत विद्यार्थी छात्रवृत्ति का इंतजार कर रहे हैं। फार्म के साथ छात्र-छात्राओं के 33 प्रतिशत से कम अंक वाले अपलोड रिपोर्ट कार्ड को सॉफ्टवेयर ने लेने से इंकार कर दिया। उन फार्मों में ऑटोमेटिक रूप से संदिग्ध डाटा (सस्पेक्टेड डाटा) की आपत्ति लगा दी। जिससे आपत्तियों का जवाब देने में संबंधित विद्यालयों के स्टाफ का सिर दर्द बना रहा।
शासन ने कोविड में कक्षा आठ तक और नौ एवं 11 के विद्यार्थियों को परीक्षा के बिना अगली कक्षाओं में प्रोन्नत करने का फरमान दिया था। उन्हें 33 प्रतिशत से कम पास वाले रिपोर्ट कार्ड नहीं बनने से परेशानी आई। वर्ष 2019-20 शैक्षिक सत्र के कक्षा आठ, नौ और 11 के विद्यार्थियों को अगली कक्षाओं में प्रोन्नत किया गया था। हर साल कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति फार्मों के साथ पिछले वर्ष के 33 प्रतिशत अंक का रिजल्ट कार्ड अपलोड करना अनिवार्य होता है। लखनऊ से वजीफे के सिस्टम में 33 प्रतिशत पास होने का सॉफ्टवेयर डाल रखा है।
शासन के दिशा निर्देशों के बावजूद सिस्टम में कोविड में विद्यार्थियों के प्रोन्नत से उत्तीर्ण होने का जिक्र नहीं किए जाने से दुश्वारियां बढ़ी। चूंकि जिन विद्यालयों में परीक्षाएं नहीं हुई, उनके सामने यह व्यवहारिक समस्या रही कि वह बच्चों के 33 प्रतिशत अंक कैसे दें। उन्होंने ऐसे विद्यार्थियों को शासन के आदेश का हवाला देकर प्रोन्नत विद कोविड का रिजल्ट कार्ड दिया था।
कॉलेज प्रबंधन द्वारा गत वर्ष अक्तूबर तक सभी वर्गों के फार्म विभाग में भिजवा दिए थे। समाज कल्याण विभाग से इंटर कॉलेजों को प्रोन्नत से अगली कक्षाओं में गए विद्यार्थियों के फार्मों पर सस्पेक्टेड डाटा की आपत्ति लगाकर जवाब मांगने में पूरा साल बीत गया। अभी तक मार्च साल के तीन दिन बचे हैं, लेकिन वजीफा पाने वाले छात्र-छात्राएं टकटकी लगाए बैठे हैं।
22 मार्च को फार्मों की तमाम आपत्तियां निस्तारित कर दी है। स्कूल कॉलेज के जवाब आने के बाद प्रमोट विद कोविड वाले सभी फार्म स्वीकृत कर लिए है। सिर्फ उन्हीं के फार्म निरस्त हुए है, जिनके फार्म गलत भरे थे, या नियमानुसार आय प्रमाण पत्र नहीं लगा था। पहले राजकीय विद्यालय, उसके बाद सहायता प्राप्त और बाद में प्राइवेट स्कूलों में छात्रवृत्ति भेजी जाती है। कक्षाओं में सर्वाधिक अंक पाने वालों और रिन्यूवल फार्म वाले विद्यार्थियों को पहले वरीयता दी जाती है। - अर्चना वर्मा, जिला समाज कल्याण अधिकारी