केंद्र सरकार के 500 और 1000 के नोट बंद करने का सबसे बड़ा असर यहां लोहा और पेपर उद्योग पर पड़ा है। फैक्ट्रियां बंद कर दी गई हैं। मालिक समझ नहीं पा रहे हैं कि क्या करें। मार्केट में अरबों की वसूली फंस गई है। कच्चे माल के भुगतान की समस्या भी उद्योगपतियों के सामने खड़ी हो गई है।
मुजफ्फरनगर की पहचान पेपर और लोहा उद्योग के रूप में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 500 और 1000 के नोट बंद करने की घोषणा से पूरा उद्योग अवाक रह गया है। फैक्ट्री मालिकों की समझ में नहीं आ रहा है कि वह क्या करें। हालात यह हैं कि कच्चे माल का भुगतान नहीं कर सकते हैं और जो माल बिक चुका है, उसका भुगतान अब जल्दी मिलने की कोई संभावना नहीं है। ऐसे हालात में उत्पादन करना केवल घाटे का सौदा रहेगा।
यही सोचते हुए अधिकतम फैक्ट्री मालिकों ने फैक्ट्री बंद कर दी है। हालात यह है कि अरबों रुपया जिसकी वसूली होनी थी, वह सब बाजार में फंस गया है। बाजार का प्रवाह पूरी तरह रुक चुका है। बिन मुद्रा के बाजार नहीं चल सकता। लोहा उद्योग से जुड़े विनेश जैन का कहना है कि जब तक लेन-देन के लिए पैसा नहीं आ जाता, फैक्टी चालू नहीं हो पाएगी। हमारा पैसा जब तक मार्केट से नहीं आता हम उनका भुगतान भी नहीं कर पाएंगे, जहां से कच्चा माल आया है।
ऐसे हालात में फैक्ट्री चला पाना मुश्किल है। उद्योगपति राजकुमार जैन का कहना है व्यापारी इस समय हतप्रभ हैं, क्या करें कुछ समझ नहीं आ रहा। धीरे-धीरे ही व्यवस्था पटरी पर आ पाएगी। पेपर उद्योग से जुड़े पंकज अग्रवाल कहते हैं कि माल नहीं आ पाने और बिके माल का पैसा नहीं मिलने के कारण प्लांट बंद करने पड़ेंगे। बृहस्पितवार को पेपर इंडस्ट्री से जुड़े लोगों की बैठक होगी, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी। व्यवस्था को किस तरह पटरी पर लाया जाए इस पर चर्चा होगी।
खुश भी हैं उद्योगपति
मुजफ्फरनगर। जिले के उद्योगपति इस बात से खुश हैं कि उन लोगों से मोटी रकम एकत्र करने वाले अफसरों का पैसा कागज बन जाएगा। कई उद्योगपतियों ने बताया कि एक्साइज, आयकर, व्यापार कर के कुछ अफसर ऐसे भी हैं, जिनके पास अरबों रुपया है। ऐसे अफसरों की काली कमाई पर मोदी की मार पड़ गई है।