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आजादी की उड़ान भर पाएंगे बुजुर्ग कैदी

Tue, 24 Nov 2015 12:32 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
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प्रदेश की समाजवादी सरकार की मंशा परवान चढ़ी तो बुजुर्ग कैदियों को आजादी की सांसें मिल सकती हैं। सूबे की जेलों में करीब 368 ऐसे कैदी हैं, जिनकी उम्र 70 साल से अधिक है। आचरण, स्वास्थ्य और सजा अवधि के आधार पर सरकार ने जाहिर किया है कि इन कैदियों को रिहा किया जाएगा। जिला जेल में बंद 12 कैदियों को सलाखों से आजाद होने की उम्मीदें जग गई हैं।
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सत्तर साल से अधिक आयु के कैदियों को जेलों से मुक्त किए जाने का खाका तैयार किया जा रहा है। अखिलेश सरकार ने मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता देने की दृष्टि से प्रदेश की जेलों में बंद बुजुर्ग कैदियों को सूचीबद्ध कराया है। गृह मंत्रालय और कैदियों की रिहाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन आड़े नहीं आई तो जिला जेल में बंद 12 कैदियों की भी किस्मत खुल सकती है।

आजीवन कारावास की सजा पाए दस कैदियों में प्रेम सिंह पुत्र श्याम सिंह 77 साल के हैं, जो कि 28 जनवरी 2002 से बंद हैं। कोर्ट से उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद रणबीर पुत्र मूला और जयपाल पुत्र ब्रह्म सिंह दस साल से कारागार में हैं। दोनों 75 साल की आयु पूरी कर चुके हैं।
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ऐसे ही दूसरे कैदी श्याम सिंह पुत्र घसीटा, नेपाल पुत्र उदय सिंह, नक्षत्र सिंह पुत्र मोहर सिंह, जयप्रकाश पुत्र दलमीर, रेशम सिंह पुत्र मेहर सिंह, अख्तर पुत्र सद्दीक, योगेंद्र पुत्र इलम सिंह हैं। दस वर्ष की सजा पा चुका लालू पुत्र बख्तावर 71 साल का है, जो 16 मई वर्ष 2011 से जेल में हैं।

बुजुर्ग कैदियों को उम्र के साथ बुढ़ापे की बीमारियों से भी जूझना पड़ रहा है। कारागार मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया ने गत सप्ताह 70 साल से ज्यादा आयु के कैदियों की रिहाई की कार्ययोजना बताई थी। तब से जेल में बंद इस आयु के कैदियों में उम्मीदों के सवाल जगे हैं।

सबसे ज्यादा उम्र का कैदी रोहताश
मुजफ्फरनगर। एडीजे कोर्ट आठ से केस संख्या 105-06 के आधीन आजीवन कारावास की सजा पाए रोहताश पुत्र हरी सिंह जिला कारागार में सबसे अधिक उम्र का कैदी है। उसकी आयु 84 साल हो चुकी है। वह आठ सितंबर वर्ष 2006 से सजा काट रहा है।
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