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दंगा पीड़ितों के आवासों पर फंसा पेंच, कस्बे के वोटर नहीं होने का मामला उठा 

Thu, 28 Dec 2017 12:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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प्रतीक चित्र। - फोटो : अमर उजाला
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शाहपुर में दंगा पीड़ितों को पीएम आवास देने के मामले में पेंच फंस गया है। लाभार्थियों की जांच कर रही एजेंसी के पात्र मान लेने के बाद बखेड़ा खड़ा हो गया है। लाभार्थियों के शाहपुर के वोटर नहीं होने और सीमा से बाहर रहने के कारण कस्बे की योजना में भागीदारी पर सवाल खड़ा हो गया है। सभासदों ने डीएम से शिकायत की है। सांसद डॉ संजीव बालियान ने भी लाभार्थियों की पात्रता की जांच पर सवाल उठाए हैं। डीएम ने मामले में डूडा पीओ धनप्रकाश को जांच सौंपी है। 
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जिले में 2013 में हुए दंगे के बाद बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोगों का गांवों से पलायन हुआ था। काफी तादाद में दंगा पीड़ित शाहपुर के आउटर में बस गए थे। नियमानुसार जिस क्षेत्र में वह बसे हैं, यह एरिया नगर पंचायत से बाहर का है। सपा सरकार में विशेष सहानुभूति रखते हुए चेयरमैन और ईओ ने दंगा पीड़ितों की बस्ती में सड़क आदि की व्यवस्था नगर पंचायत की ओर से करा दी थी, लेकिन काफी प्रयासों के बाद भी नगरीय क्षेत्र में नहीं होने के कारण इनके वोट नहीं बन पाए थे।

केंद्र सरकार की पीएम आवास योजना शहरी क्षेत्र के लिए अलग है और ग्रामीण क्षेत्र के लिए अलग। शाहपुर के आधार कार्ड बनवाकर दंगा पीड़ितों और उनके साथ रह रहे अन्य लोगों ने पीएम आवास के लिए शहरी क्षेत्र में आवेदन किया था। लाभार्थियों की जांच कर रही विजन इंफ्राटेक कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में इन्हें पात्र मान लिया। सपा समर्थित तत्कालीन चेयरमैन और ईओ ने यह लिखकर दे दिया था कि यह कस्बे के ही निवासी हैं।
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इस बीच प्रदेश और नगर पंचायत दोनों में ही सत्ता परिवर्तन हो चुका है। प्रदेश में भी भाजपा की सरकार आ चुकी है और चेयरमैन भी भाजपा का जीत गया। पीएम आवास योजना की 223 परिवारों की सूची जैसे ही नगर पंचायत में पहुंची, सीमा से बाहर के लोगों के नाम सूची में देख सब हतप्रभ रह गए। शाहपुर के वार्ड-11 की सभासद निर्मला चौधरी ने अन्य सभासदों के साथ मिलकर डीएम को लिखित में शिकायत दी है कि सूची में अपात्रों और कस्बे से बाहर के लोगों का चयन किया गया है।

मामला भाजपा नेताओं के सामने पहुंचा तो वह भी सक्रिय हो गए। भाजपा सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ संजीव बालियान ने इस मामले में डीएम से वार्ता कर उन्हें नियमानुसार काम करने के लिए कहा। इस मामले के तूल पकड़ने से दंगा पीड़ितों के आवास बनने में पेंच फंस गया है। डूडा के परियोजना अधिकारी धनप्रकाश से जब इस संबंध में बात हुई, तो उन्होंने बताया कि पात्र चयन का कार्य अलग कंपनी कर रही है। आधार कार्ड और नगर पंचायत की रिपोर्ट पर उसने नगरीय क्षेत्र से बाहर के लोगों को पात्र मान लिया। अब मौके पर पहुंचकर जांच होगी। नियमानुसार ही कार्रवाई की जाएगी। 

गलत रिपोर्ट नहीं  दी जाएगी: सैनी 
मुजफ्फरनगर। शाहपुर नगर पंचायत के चेयरमैन परमेश सैनी का कहना है कि पीएम आवास योजना के पात्रों के विवाद से वह अलग हैं। कुछ गलत रिपोर्ट के कारण सीमा से बाहर के लोगों का चयन हुआ। वह अपने कार्यकाल में कोई गैरकानूनी काम नहीं करेंगे, जो सही है नगर पंचायत अपनी ओर से वही रिपोर्ट देगी। 

पात्रों को ही मिले आवास: बालियान 
मुजफ्फरनगर। भाजपा सांसद डॉ संजीव बालियान का कहना है कि वह किसी दंगा पीड़ित के विरोधी नहीं हैं। वह चाहते हैं कि सरकार का लाभ पात्रों को ही मिले। सूची में काफी संख्या में अपात्रों का चयन किया गया है, जिन लोगों के वोट कस्बे में नहीं हैं, उन्हें शहरी योजनाओं का लाभ कैसे दिया जा रहा है, इसकी जांच होनी चाहिए। 

अपात्रों को पैसा जारी  नहीं होगा: डीएम 
मुजफ्फरनगर। डीएम जीएस प्रियदर्शी का कहना है कि किसी भी अपात्र को पीएम आवास योजना का पैसा जारी नहीं होगा। डूडा पीओ को जांच सौंप दी गई है, जो शिकायत आई है उसमें एक तो लाभार्थी अपात्र होने का मामला है, दूसरा सीमा से बाहर के लोगों को कस्बे की योजना से जोड़ने का मामला है। दोनों की जांच होगी। गलत रिपोर्ट देने वाले कर्मचारियों पर भी कार्रवाई होगी। 
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