मोरना मिल को 15 अक्तूबर तक चलाए जाने का दबाव
मोरना। मोरना मिल गन्ना पेराई सत्र 15 अक्तूबर तक चलाए जाने की क्षेत्रीय किसानों की मांग का दबाव मिल प्रबंधन पर लगातार बना हुआ है। कोरोना को मात देकर आए मिल कर्मचारी और इंजीनियरों की टीम लगातार कार्य कराने के प्रयास में जुटी हुई हैं।
दि गंगा किसान चीनी मिल का क्षेत्रफल काफी अधिक होने व पेराई क्षमता कम होने की वजह से गन्ना पेराई सत्र में भारी दबाव बना रहता है। विगत गन्ना सत्र में मिल ने 51 लाख 30 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई जून माह तक की थी। इसके चलते गन्ना रिकवरी निचले स्तर पर पहुंचने से मिल को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। इस बार भी किसानों को गन्ना सट्टा 51 लाख 52 हजार निर्धारित किया गया है। मिल की प्रतिदिन 25 हजार क्विंटल की गन्ना पेराई किए जाने की क्षमता है। नतीजतन 210 दिनों तक मिल को निरंतर बिना रुके गन्ने की पेराई करनी होगी, तब कही जाकर मई माह 2021 तक गन्ना पेराई सत्र समाप्त होगा। मिल को निर्धारित तिथि पर चलाए जाने को लेकर कार्यवाहक मिल प्रबंधक सर्वेश सिंह के दिशा निर्देशन में सहायक इंजीनियर शशिकांत यादव, राजेंद्र सिंह सहित टेक्निकल स्टाफ मिल के कलपुर्जों की मरमत करने में जुटी हुई है। मिल परिसर में दो दर्जन से अधिक कर्मचारी और अधिकारी कोराना संक्रमित हो गए थे, जो अब स्वस्थ होकर मिल को तय समय पर चलाने के लिए कार्य करने में जुटे हुए हैं। अनिल संख्वार व राजीव तोमर ने बताया कि मैन्यूफैक्चरिंग के तहत मोटर मरमत्त, पाइपों और बायलर के खराब हिस्सों को निकाल कर उनकी अच्छी तरह से मरम्मत की जा रही है। इटीपी प्लांट पूरी तरह तैयार कर लिया गया है। विगत वर्ष में 2019 सत्र में 4 करोड़ 90 लाख 12 हजार मिल मरम्मत करने में खर्च किया गया।