मुजफ्फरनगर। स्वामी कल्याण देव जिला चिकित्सालय में समाजसेवी मनेश गुप्ता को पुलिस की ओर से घसीटे जाने के मामले में लोगों के बीच नाराजगी है। सामाजिक कार्यकर्ता मनेश गुप्ता के दो बड़े भाई देश की आजादी की लड़ाई में जेल गए है। समाज के गरीब लोगों से अस्पतालों में रिश्वत लेने से वह आहत है। वह कहते हैं कि हमारे परिवारों के लोग इन भ्रष्ट लोगों के लिए जेल नहीं गए थे। हमारे अंदर वही खून है हम भ्रष्ट व्यवस्था के इस कॉकस से डरने वाले नहीं है। जल्दी ही जिला चिकित्सालय के भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा आंदोलन होगा।
जिला अस्पताल में भ्रष्टाचार की शिकायत पर मनेश गुप्ता के साथ कर्मचारियों और चिकित्सकों ने जिस तरह का व्यवहार किया वह तो एक सामाजिक कार्यकर्ता के साथ आम तौर पर होता ही है। इस भ्रष्ट व्यवस्था में यही कल्पना की जा सकती है। इस पूरे मामले में पुलिस ने 80 साल के बुजुर्ग मनेश गुप्ता को जिस तरह घसीटा और गाड़ी में डाल के ले गई यह सरकार और उसकी पुलिस की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। पुलिसकर्मियों और अस्पताल के कर्मचारियों को यह मालूम होना चाहिए कि मनेश गुप्ता उसी परिवार से ताल्लूक रखता है जिन लोगों के कारण इस देश को अंग्रेजों से आजादी मिली है। मनेश गुप्ता के दो बड़े भाई देश की आजादी में जेल गए है।
मूल रूप से चरथावल क्षेत्र के गांव दूधली के रहने वाले मनेश गुप्ता का परिवार प्रेमपुरी में रहता है। चिकित्सा के क्षेत्र में उनके परिवार का कम योगदान नहीं है। उनके सगे भतीजे मनोज गुप्ता एम्स ऋषिकेश के डीन हैं। बिना किसी लोभ लालच के आयु के अंतिम पड़ाव पर गरीबों की सेवा में लगे मनेश गुप्ता के साथ अस्पताल में घटी घटना आम जन मानस में चर्चा का विषय बनी है।
दो साल रहे थे बरेली जेल में
मनेश गुप्ता के बड़े भाई लक्ष्मीचंद और आत्माराम ने 1942 के भारत छोड़ों आंदोलन में भाग लिया था। उन्हें अंग्रेजों ने दो साल की सजा सुनाई। दोनो भाई दो साल तक सेंट्रल जेल बरेली में रहे।
भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने वालों पर होते रहे हमले
जिला चिकित्सालय में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों पर पहले भी हमले हुए हैं। भाकियू के दमदार नेता कहे जाने वाले चंद्रपाल फौजी तक की यहां पिटाई कर दी गई थी। आंदोलनकारी मास्टर विजय सिंह को यहां जान बचाकर भागना पड़ा। सामाजिक कार्यकर्ता मनेश गुप्ता के साथ घटी घटना कोई नई बात नहीं है।