घर में ही रहकर की इबादत, रखा रोजा
मुजफ्फरनगर। लॉकडाउन में मुकद्दस रमजान माह की शुरूआत के पहले दिन लोगों ने अपने घरों में रहकर ही इबादत की। सुबह सहरी के बाद नमाज अदा कर रोजेदारों ने घर में ही आराम किया। मुस्लिम मोहल्लों में सुबह छह से नौ बजे तक दुकानें खुलीं, लेकिन इसके बाद पूरे दिन सन्नाटा पसरा रहा। मुस्लिम बहुल मोहल्ला खालापार व लद्दावाला में पहले रोजे के कारण आम दिनों की अपेक्षा मोहल्लों में चहलकदमी भी कम ही रही। वहीं, कोरोना संक्रमित जमाती मिलने के बाद से हॉटस्पॉट बने मोहल्ला किदवईनगर में सील होने के कारण लोगों को घरों में ही रोजा सहरी व इफ्तार से संबंधित सामान की होम डिलीवरी प्रशासन द्वारा कराई गई।
मोहल्ला खालापार निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता असद जमां ने बताया कि तड़के तीन बजे सहरी की तैयारियां कीं। सहरी के बाद नमाज अदा कर पूरे दिन घर में ही रहकर लॉकडाउन का पालन करते हुए इबादत की। शाम सात बजे करीब रोजा इफ्तार कर फिर से घर में ही रहकर अगले दिन की तैयारियां कीं। मोहल्ला खालापार निवासी रोमाना अंसारी व फरीदा परवीन ने बताया कि लॉकडाउन के चलते दो दिन पहले ही रोजा सहरी व इफ्तार के लिए जरूरी सामान की व्यवस्था कर ली गई थी। इसलिए घर से निकलने का कोई मतलब नहीं रहा। सुबह सहरी के बाद नमाज अदा की। दिनभर आराम के बाद शाम को इफ्तारी की तैयारियों में लग गए। मिमलाना रोड निवासी हकीम साजिद अहमद ने बताया कि रमजान का पहला रोजा बहुत सुकून में बीता। सुबह सहरी के बाद नमाज अदा कर आराम किया। इसके बाद क्लीनिक खोलकर मरीज देखे और शाम पांच बजे इफ्तारी की तैयारियां कीं। दूध विक्रेता साजिद अहमद का कहना है कि सुबह सहरी के बाद नमाज अदा कर दूध सप्लाई की। दूध की खपत पहला रोजा होने के कारण पहले से बढ़ी है। सुबह के बाद शाम को भी दूध सप्लाई बढ़ी है, लोग सहरी के लिए दूध का इंतजाम एक दिन पहले ही कर रहे हैं। मोहल्ला खालापार निवासी नाहिद अंजुम का कहना है कि लॉकडाउन में मुकद्दस रमजान का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि पूरे परिवार ने घर में ही रहकर नमाज अदा करने के साथ इबादत की। पूरे दिन सभी लोग लॉकडाउन का पालन करते हुए घर में ही रहे।