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Muzaffarnagar News: थोक में आलू मंदा, फुटकर में महंगा...व्यापारी और उपभोक्ता दोनों पर मार

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सब्जी मंडी में आलू बेंचता खुदरा व्यापारी मुकेश सैनी। संवाद
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मुजफ्फरनगर। आलू के भाव ने किसान से लेकर व्यापारी और उपभोक्ता तक सभी को उलझन में डाल दिया है। मंडी में थोक आलू औसतन करीब एक हजार रुपये प्रति क्विंटल यानी 10 रुपये किलो बिक रहा है। जबकि यही आलू उपभोक्ताओं को फुटकर बाजार में करीब 20 रुपये किलो खरीदना पड़ रहा है। थोक और फुटकर भाव में दोगुना के अंतर से जहां व्यापारी कम मांग और मंदी से परेशान है। वहीं ग्राहक को भी जेब ढ़ीली करनी पड़ रही है। हालात ये है कि जनपद के नौ कोल्ड स्टोर में भंडारित किये गए आलू का केवल 40 प्रतिशत ही मार्केट में आ पाया है।
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जनपद में आलू का उत्पादन सीमित होता है। किसानों की ओर से 920 हेक्टेयर रक्बे में ही खेती कर 39150 मीट्रिक टन आलू की फसल पैदा की गई। आम तौर से जनपद में आलू अलीगढ़, सासनी, हापुड़, संभल और एवं पंजाब से आता है।
आलू व्यापारियों की ओर से अलग-अलग जनपद के किसानों से खरीदे गए 33682 मीट्रिक टन आलू का भंडारण अलग-अलग नौ शीतगृहों में किया गया। लेकिन अभी तक 13313 मीट्रिक टन (40 प्रतिशत) आलू ही मार्केट में बिक पाया। जबकि 20369 मीट्रिक टन आलू का भंडारण अभी शेष है।
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दूसरे जनपदों में आलू की बंपर फसल से बिगड़े हालात

आलू व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्रजीत राठी ने बताया कि इस बार आलू की बंपर फसल हुई है। जिससे मार्केट में आलू के थोक दाम काफी गिरे हुए हैं। चिप्सोना, 37-97 और डायमंड किस्म के आलू की तो मार्केट में डिमांड है भी, लेकिन हाईब्रिड आलू का तो ट्रांसपोर्टेशन चार्जेज भी वसूल नहीं हो पा रहा।

हाईब्रिड की गुणवत्ता खराब लेकिन भंडारण सर्वाधिक
आलू व्यापारी योगेश कुमार गुप्ता का कहना है कि हाईब्रिड आलू की पैदावार अधिक होती है। जिस कारण किसानों ने इस किस्म के आलू की अधिक पैदावार ली। लेकिन गुणवत्ता खराब होने के कारण उसे खरीदने के लिए कोई तैयार नहीं। थोक बाजार में इसका दाम काफी कम है। शीतगृहों में भी इसका ही अधिक भंडारण है।

सस्ता मानकर भी 20 से कम नहीं पड़ रहा आलू

सब्जी मंडी में आलू खरीदने पहुंची बुजुर्ग सदीकन ने बताया कि महंगाई के दौर में आलू खाकर काम नहीं चलाया जा सकता। सस्ता मानकर भी आलू 20 रुपये प्रति किलो से कम नहीं पड़ रहा। पहाड़ी 50 रुपये है, जबकि चिप्सोना 20 रुपये पड़ रहा है। एक पानी वाला (हाईब्रिड) आ रहा है, लेकिन उसे 10 में लेकर भी लाभ नहीं।


100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से आलू किसानों को अनुदान

जिला उद्यान अधिकारी अवनीश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि निजी शीतगृहों में आलू भंडारण पर किसानों को 100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अनुदान मिलेगा। अधिकतम दो हेक्टेयर क्षेत्रफल और 200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की अनुमन्य मात्रा के आधार पर लाभ दिया जाएगा। योजना में अधिकतम 200 क्विंटल आलू पर अनुदान मिलेगा। इस तरह एक किसान को अधिकतम 20 हजार रुपये की सहायता मिल सकेगी। बाजार में आलू का भाव निर्धारित स्तर से नीचे जाने पर किसानों को भामाशाह भाव स्थिरता कोष के तहत राहत दी जाएगी। इसमें निर्धारित लागत के 25 प्रतिशत अथवा उत्पादन लागत और बिक्री मूल्य के अंतर, दोनों में से जो कम होगा, उसकी प्रतिपूर्ति अनुदान के रूप में की जाएगी।
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