मुजफ्फरनगर। उद्यान विभाग के पास अभी आलू का बीज नहीं आया है। ऐसे में आलू की अगेती फसल की बुवाई करने वाले किसान दोगुना दाम पर आलू का बीज खरीदने को मजबूर हैं। इस बार आलू के दाम काफी अच्छे रहने पर किसान अगेती फसल बुवाई में लग गए हैं। गत वर्ष बीज 1745 रुपये प्रति क्विंटल मिला था। इस बार यह बीज 3000 से 3500 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रहा है।
जनपद में गन्ने की पैदावार सबसे अधिक होती है। इसलिए आलू की खेती ज्यादा किसान नहीं करते है। फिर भी रामराज खादर क्षेत्र में जमीन आलू के लिए अच्छी होने के कारण वहां के किसान आलू की खेती है। इसके अलावा मोरना और भोपा क्षेत्र के किसान भी आलू की खेती करते है। जिले में गत वर्ष आलू का रकबा 400 हेक्टेयर था। आलू की फसल इस बार अच्छी मुनाफे वाली साबित हुई है। आलू फुटकर में 40 रुपये तक बिक रहा है। ऐसे में इस बार रकबा बढ़ने की उम्मीद है।
जनपद में खादर क्षेत्र के किसान पक्की फसल के लिए अक्तूबर में आलू की बुवाई करते हैं, मगर भोपा के कासमपुरा, बरुकी, जौली, विलायतनगर, बसेड़ा आदि ग्रामों के किसान आलू की अगेती फसल की बुवाई करते हैं, जो नवंबर के अंत तक पूरी हो जाती है। इसके बाद किसान खेत खाली होने पर गेंहू की वुबाई करते है। इन ग्रामों के किसानों ने आलू की अगेती फसल की बुवाई शुरू कर दी है, मगर उन्हें सरकारी बीज उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। ऐसे में वे कोल्ड स्टोरेज से व्यापारियों और किसानों का रखा हुआ बीज खरीद रहे है। कासमपुरा के किसान सहेंद्र संजय, सोनू और नीटू ने बताया कि आलू का बीज 3500 रुपये तक खरीदना पड़ रहा है, क्योंकि उद्यान विभाग के पास बीज नहीं है। आलू व्यापारी राज नारंग ने बताया कि इन दिनों आलू की अगेती फसल की बुवाई चल रही है। आलू की प्रजाति कूफरी बहार 3797 और कूफरी चिपसोना-1 की मांग ज्यादा है, जिसके दाम 3000 से लेकर 3500 रुपये प्रति क्विंटल तक है। यह फसल नवंबर के अंत तक तैयार हो जाती है।
तीन क्विंटल प्रति बीघा की जरूरत
आलू की बुवाई के लिए प्रति बीघा तीन क्विंटल आलू की जरूरत पड़ती है। फसल पूरी होने पर 12 से 15 क्विंटल प्रति बीघा उत्पादन आलू का होता है।
इन प्रजाति की रहती है मांग
जिले में सबसे अधिक कूफरी बहार 3797 और चिपसोना-1 की मांग ज्यादा रहती है। इनके अलावा कूफरी चिपसोना-3, कूफरी ख्याति, कूफरी गरिमा, पुखराज, मोहन प्रजाति के आलू की भी बुवाई किसान करते है।
रकबा बढ़ने की उम्मीद
जिले में गत वर्ष 400 हेक्टेयर में किसानों ने आलू की फसल की बुवाई की थी। इस बार आलू की फसल अच्छी होने और दाम भी सही मिलने पर किसानों में आलू की फसल को लेकर उत्साह है, इसलिए रकबा बढ़ने की उम्मीद है।
अक्तूबर में आएगा बीज, 200 क्विंटल की मांग
जिला उद्यान अधिकरी सतेंद्र पाल मान ने बताया कि अभी तक सरकार ने आलू के बीज का दाम घोषित नहीं किया है तथा ना ही आलू का बीज आया है। अक्तूबर में बीज आने की उम्मीद है। निदेशालय उद्यान एवं खादय प्रसंस्करण लखनऊ से इस बार 200 क्विंटल आलू के बीज की मांग की गई है। किसानों ने बीज लेने के लिए प्रार्थना पत्र देने शुरु कर दिए है।