जिले के उद्यान विभाग में जो पोस्ट ही नहीं है, एक अधिकारी उस पोस्ट पर 15 साल तक नौकरी करता रहा। सहारनपुर में पोस्टिंग होने के बाद नौकरी अपने गृह जनपद मुजफ्फरनगर में करता रहा। कमाल की बात यह है कि 15 साल तक वेतन सहारनपुर से ही लिया गया। मुख्यमंत्री को शिकायत हुई तो मामला सामने आया और निदेशक ने उसे सहारनपुर मूल पद पर भेज दिया।
सरकारी दफ्तरों में अंधेरगर्दी का एक बड़ा मामला सामने आया है। जिले के सुबोध तोमर की सहारनपुर में उद्यान विभाग में सांख्यिकी अधिकारी के पद पर तैनाती हुई थी। नौकरी के ज्वाइनिंग के कुछ दिन बाद ही उसने उच्चाधिकारियों से मिली भगत कर अपना अटैचमेंट मुजफ्फरनगर में करा लिया, जबकि यहां पर उनका पद भी स्वीकृत नहीं हैं।
सेटिंग का सबसे बड़ा खेल ये था कि पोस्टिंग सहारनपुर में होने के कारण वेतन 15 साल से वहीं से निकाल रहा है और नौकरी जिले में कर रहा है। जिला उद्यान अधिकारी एसी पाठक ने बताया कि सहारनपुर के एक एनजीओ और चरथावल के एक समाजसेवी ने मुख्यमंत्री कार्यालय को शिकायत की थी। शिकायत के बाद निदेशक उद्यान विभाग ने सुबोध तोमर को यहां से हटा दिया।
उसको रिलीव भी कर दिया गया है। पाठक ने बताया कि कानून के हिसाब से तोमर की जिले में नियुक्ति हो ही नहीं सकती। उसका इस जिले में पद ही नहीं है। यहीं कारण है कि उसका वेतन लगातार सहारनपुर से ही निकल रहा है। उन्होंने बताया कि इससे पहले जिन उद्यान अधिकारियों ने उसकी शिकायत की उनको यहां से तबादला झेलना पड़ा।
उद्यान अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर किए
उद्यान विभाग में मठाधीश बने सुबोध तोमर ने कई कागजों में अनुपस्थिति में उद्यान अधिकारी एसी पाठक के हस्ताक्षर कर दिए। इस मामले की जांच चल रही है। पाठक ने बताया कि उनके फर्जी हस्ताक्षर करने के बाद बैंकों से ऋण ले लिया गया है। वह बैंकों को भी पत्र जारी कर रहे हैं।