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शेरपुर में पहले भी हुआ था पुलिस टीम पर हमला

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मुजफ्फरनगर। गांव शेरपुर में तीन साल में पुलिस टीम पर हमले की यह दूसरी वारदात है। शुक्रवार को पुलिस के साथ हाथापाई कर जिस इमलाख को छुड़ाया गया, उसी ने तीन साल पहले पुलिस पर हमले की अगुवाई की थी। वर्ष 2017 में गोकशी पकड़ने पहुंची पुलिस टीम पर पथराव किया गया था, पुलिस जीप में तोड़फोड़ की थी और पुलिस की चीता बाइकों में आग लगा दी गई थी। इस घटना में भी हिस्ट्रीशीटर इमलाख समेत कई के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी। इस मामले में भी हिस्ट्रीशीटर को ही मास्टरमाइंड मानते हुए पुलिस ने कई मुकदमे दर्ज किए थे। अब एक बार फिर इमलाख खान को ही छुड़ाने के लिए पुलिस टीम पर हमला किया गया है। इसमें इमलाख के साथ ही उसके परिजन भी पुलिस ने नामजद किए हैं। संवाद
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कोचिंग सेंटर संचालक से शिक्षा माफिया बना इमलाख
गांव शेरपुर निवासी इमलाख खान बीते दस-12 साल के भीतर कोचिंग सेंटर संचालक से बड़ा शिक्षा माफिया बन बैठा। इमलाख ने रुड़की चुंगी पर बाबा कोचिंग सेंटर से कॅरियर की शुरूआत की और धीरे-धीरे युवाओं को दूरस्थ एजूकेशन के तहत शैक्षिक डिग्रियां बांटनी शुरू कर दी। इसके बाद वह देखते ही देखते करोड़ों में खेलने लगा। इस दौरान उस पर बड़े पैमाने पर फर्जी डिग्रियां बांटने का भी आरोप लगा। वर्तमान में वह छपार क्षेत्र में कई बीघा जमीन में बड़ा कॉलेज कैंपस बनाने की तैयारी में जुटा हुआ था, जिसमें मेडिकल कॉलेज तक शामिल था। करीब छह माह पूर्व पुलिस-प्रशासन ने इस पूरे कैंपस को गैंगेस्टर एक्ट के तहत जब्त कर लिया था।
दो युवकों को एनआईए ने किया था गिरफ्तार
करीब डेढ़ साल पूर्व गांव शेरपुर के दो युवकों को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने गिरफ्तार किया था, जिन पर आतंकी फंडिंग करने का आरोप था। इस मामले में अब भी एनआईए की जांच जारी है।
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