जानसठ में पैदल अपने घर लौटने वाले दिहाड़ी मजदूरों को भोजन कराते भाजपा कार्यकर्ता।
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खेतों में हम नहीं जाएंगे, तो पशुओं के लिए चारा कहां से आएगा
जानसठ। कोरोना वायरस को लेकर लॉकडाउन के दौरान पशुपालकों को खेतों में चारा लेने जाते समय पुलिसकर्मी रोकटोक करते हैं। रविवार की सुबह ऐसा ही नजारा देखने को मिला। इस पर पुलिसकर्मी बोले अपने घरों को वापस जाओ। इस पर पशुपालक बोले कि खेतों में हम नहीं जाएंगे, तो पशु चारा कहां से खाएंगे। पुलिसकर्मियों ने पशुपालकों से कहा कि सुबह छह बजे अपने खेतों पर जाओ और तीन घंटे बाद नौ बजे तक चारा लेकर वापस अपने घर आओ।
लॉकडाउन को लेकर पशुपालक भी मुसीबत के दौर से गुजर रहे हैं। पशुपालक भी चाहते हैं कि वे भी किसी भी सूरत में अपने घरों से बाहर नहीं निकलें, लेकिन पशुओं की भूख प्यास के आगे पशुपालक अपने को घरों में रोक नहीं पा रहे हैं। दुधारू पशुओं के लिए हरा चारा तो जरूर चाहिए, नहीं तो वे दूध नहीं देंगी। पशुपालक राजेश, सतीश, हरपाल, सीताराम आदि का कहना है कि वे लॉक डाउन का स्वागत करते हैं, यह लॉकडाउन उनकी जिंदगी की सलामती के लिए ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगाया है। उनके सामने मजबूरी यह है कि पशुओं को खिलाने को चारा खेतों से लाना अति आवश्यक है। रविवार की सुबह पशुपालकों को खेतों में जाते हुए रोका तो, पशुओं को चारा लाने की बात सुनकर पुलिसकर्मियों को भी खेतों में जाने की इजाजत देनी पड़ी। पशुपालकों का कहना है कि लॉकडाउन का किसी भी सूरत में उल्लंघन नहीं करेंगे।