देवबंद(सहारनपुर)। पवित्र रमजान माह में सफर (यात्रा) करने की हालत में शरीयत में रोजा छोड़ने की इजाजत है। उलमा का कहना है कि सफर की हालत में रोजा छोड़ने की इजाजत जरूर है, लेकिन इसके लिए कुछ जरूरी शर्ते भी हैं। जिन पर अमल करना बेहद जरूरी है।
तंजीम अब्ना-ए-दारुल उलूम के अध्यक्ष मुफ्ती यादे इलाही कासमी ने इस्लामी पुस्तक किफायतुल मुफ्ती का हवाला देते हुए बताया कि यात्रा की हालत में रोजा तभी छोड़ा जा सकता है जब 48 मील यानी 70.25 किलोमीटर या उससे अधिक दूरी का सफर हो। शरई सफर की शर्त 48 मील है। बताया कि सफर की हालत में रोजा छोड़ने की इजाजत के साथ ही नमाज भी आधी हो जाती है। कहा कि रमजान माह में सफर दुश्वारियों से भरा हो या आसान, पैदल हो या सवारी, रेल का हो या कार का या फिर हवाई जहाज का, हर हाल में मुसाफिर के लिए रोजा नहीं रखने की गुंजाइश है, लेकिन अगर सफर की हालत में रोजा कजा न किया जाए तो बेहतर है। यदि सफर में रोजा छोड़ दिया तो रोजा छोड़ने वाले व्यक्ति पर कजा (बाद में रोजा रखना) लाजिमी है।