मुजफ्फरनगर। जिला और महिला चिकित्सालय सहित जनपद के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर एक वर्ष के दौरान 28 लाख से अधिक मरीजों ने चिकित्सकों से परामर्श लिया। इनमें से 15 लाख से अधिक मरीजों की आभा आईडी बनाई गई। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से एक भी मरीज की आभा आईडी में चिकित्सकों की ओर से दिये गए उपचार का ब्यौरा (इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड) दर्ज नहीं किया गया। इससे योजना का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा।
स्वामी कल्याण देव जिला चिकित्सालय और जिला महिला अस्पताल सहित सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपचार के लिए पहुंचने वाले मरीजों के पंजीकरण के साथ ही आभा आईडी बनाई जाती है। एक वर्ष के दौरान जनपद के 28,87,198 मरीजों ने ओपीडी पहुंचकर चिकित्सकों से परामर्श लिया।
पंजीकरण के साथ-साथ उनमें से 15,92,714 मरीजों की आभा आईडी बनाई गई। लेकिन परामर्शदाता चिकित्सकों के पास कंप्यूटर एवं इंटरनेट सुविधा नहीं होने के कारण एक भी मरीज को दिया गया उपचार का ब्यौरा उसमें दर्ज नहीं किया गया। इससे मरीजों को भविष्य में उपचार कराने में मदद मिलती है। डाटा दर्ज नहीं होने से मरीजों काे आभा आईडी का कोई लाभ नहीं मिलेगा।
ये होती है आभा आईडी और उसका उपयोग
आभा आईडी का मतलब आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता से है। यह एक डिजिटल स्वास्थ्य आईडी है, जिसमें 14 अंकों का एक विशिष्ट कोड होता है। यह आईडी किसी भी मरीज को भारत के डिजिटल हेल्थकेयर इकोसिस्टम में भागीदार के रूप में पहचानती है, जिसे पूरे देश में स्वास्थ्य सेवा प्रदाता स्वीकार करते हैं। आइडी में मरीज का इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड दर्ज रहता है।
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शीघ्र ही दर्ज होगा उपचार का ब्यौरा : डॉ.विपिन
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के नोडल अधिकारी डिप्टी सीएमओ डॉ. विपिन कुमार का कहना है कि आभा आईडी के मामले में स्वास्थ्य विभाग एक-एक स्टेप आगे बढ़ रहा है। शुरुआत में पंजीकरण और फिर मरीज का पैथोलॉजी का ब्यौरा आईडी में फीड होना शुरू हुआ। शीघ्र ही ओपीडी में एक-एक डाटा एंट्री ऑपरेटर की नियुक्ति होगी। जो चिकित्सक की ओर से मरीज को दिये गए परामर्श को आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाते में दर्ज करेगा।
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आभा आईडी में होता है अधिक समय बर्बाद
जिला चिकित्सालय में उपचार के लिए पहुंची सईदा ने बताया कि आभा आईडी बनवाने में काफी समय लगा। उन्हें नहीं मालूम की इसका लाभ क्या है। लाइन में एक घंटा लगने के बाद पता चला कि आभा आईडी बनवानी है।
आधार कार्ड नहीं, इसलिए आभा आईडी नहीं बनी
बुजुर्ग कृष्णा ने बताया कि उसे नहीं मालूम था कि आभा आईडी बनवानी आवश्यक है। उसके पास आधार नहीं था। इसलिए सादी पंजीकरण पर्ची पर ही चिकित्सक से परामर्श लिया। बताया कि नहीं मालूम की आभा आईडी क्या होती है।