मांगों को लेकर कलक्ट्रेट में प्रदर्शन करते ई-रिक्शा चालक।
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मुजफ्फरनगर में एआरटीओ ने ई-रिक्शा चालकों के लाइसेंस बनाए जाने पर रोक लगा दी है। ई-रिक्शा का पंजीकरण न कराने वाले चालकों का भी लाइसेंस निरस्त किया जाएगा। इससे चालकों में हड़कंप मचा हुआ है। उधर, ई-रिक्शा चालकों ने कलक्ट्रेट में प्रदर्शन कर शोषण करने का आरोप लगाया।
प्रशासन द्वारा ई-रिक्शा को पाबंदी लगाने के निर्देश पर चालकों ने हड़ताल की थी। जिस पर प्रशासन ने इनके लाइसेंस बनाए जाने तथा ई-रिक्शा के पंजीकरण का आश्वासन दिया था। जिस पर ई-रिक्शा चालकों ने लाइसेंस बनाए जाने के लिए आवेदन किया। जिसके लिए मेडिकल सर्टिफिकेट की कॉपी ली गई। तीन दिन के भीतर ही एआरटीओ दफ्तर से 1200 से अधिक ई-
रिक्शा चालकों के लाइसेंस बनाए गए। ई-रिक्शा के पंजीकरण की जांच की गई तो वह 90 ही निकले हैं। जिसमें पता लगा कि बन चुके लाइसेंस में अधिकांश गैर ई-रिक्शा चालक हैं। इस पर विभाग ने फिलहाल इनके लाइसेंस बनने पर रोक लगा दी है। अब विभाग उसका लाइसेंस बनाएगा, जो अधिकृत कंपनी से खरीदी गई ई-रिक्शा का बिल प्रस्तुत करेगा और उसका पंजीकरण कराएगा। अन्य लोगों के लाइसेंस नहीं बनेंगे।
एआरटीओ राजीव कुमार बंसल ने बताया कि ई-रिक्शा का पंजीकरण न कराने वाले चालकों को लाइसेंस नहीं दिया जाएगा। बन चुके लाइसेंस हैं, उन पर भी कार्रवाई होगी। उधर, ई-रिक्शा चालकों ने कचहरी में प्रदर्शन कर शोषण और उत्पीड़न का आरोप लगाया। चालकों ने नगर पालिका की तरह पैडल रिक्शा की तर्ज पर ही पंजीकरण की मांग की है। कई अन्य मांगों को लेकर डीएम को ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान सुभाष उपाध्याय, मोहम्मद हाजी हनीफ, इमरान, फरमान आदि रहे।