कमहेडा निवासी भजनोपदेशक पंडित ब्रजपाल शर्मा कर्मठ।(फाइल फोटो)
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पुरकाजी (मुजफ्फरनगर)। प्रसिद्ध भजनोपदेशक पंडित ब्रजपाल शर्मा ‘कर्मठ’ (85) का शुक्रवार को पैतृक गांव कमहेड़ा, तुग़लकपुर में निधन हो गया है। उनके देहावसान पर आर्य समाज और अन्य सामाजिक संगठनों ने शोक व्यक्त किया।
पुरकाजी क्षेत्र के गांव कमहेड़ा में शुक्रवार सुबह चार बजे भजनोपदेशक ‘कर्मठ’ ने जीवन की अंतिम सांस ली। पिता पंडित किशन लाल शर्मा तथा माता चंद्रवती देवी के यहां 15 अक्टूबर, 1934 को कमहेड़ा में जन्मे ‘कर्मठ’ ने बरला के संस्कृत विद्यालय से आचार्य मुरारी लाल शर्मा से शिक्षा ग्रहण की। आकाशवाणी से स्वर परीक्षा उत्तीर्ण करने के उपरांत उनके गीत रेडियो पर प्रसारित होने लगे। उन्हें वैदिक भजनों की प्रेरणा महाशय केहर सिंह गोधना तथा भजनोपदेशक अभय राम शर्मा सहारनपुर से प्राप्त हुई। ‘कर्मठ’ ने राखी की लाज, शहीद भगत सिंह, स्वतंत्रता संग्राम, समाज सुधार आदि विषयों पर 30 से अधिक पुस्तकें लिखी। सब के गुण, अपनी हमेशा गलतियां देखा करो, उनका सबसे मशहूर गीत है।
वह अपने पीछे पत्नी राम कली शर्मा, विवाहित पुत्री संगीता तथा पुत्र अरविंद को छोड़ गए हैं। वैदिक संस्कार चेतना अभियान संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि ‘कर्मठ’ ने नि:स्वार्थ भाव से देश में वैदिक संस्कृति की अलख जगाई थी। आर्य समाज नई मंडी के आरपी शर्मा, आनंद पाल सिंह आर्य, मंगत सिंह, योगेश्वर दयाल ने शोक व्यक्त किया। गांव में ही वेद मंत्रोच्चार के साथ उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
देशभर में संस्कृत विद्यालय खोलने के थे पक्षधर
पुरकाजी। ऋषि दयानंद के समाज सुधार आंदोलन को बढ़ाने के लिए पंडित ब्रजपाल शर्मा ने देश भर में भ्रमण किया। वह बुराइयों के उन्मूलन की जागृति जगाने ऐसे तल्लीन हुए कि 1965 में सूचना विभाग में मिली सरकारी नौकरी भी छोड़ दी। उनके भजनों को 1968 में दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय आर्य सम्मेलन में ख्याति मिली, जिसमें 22 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। वो देश में अधिक संस्कृत विद्यालय खोलने के पक्षधर थे।