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जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव : मुजफ्फरनगर में वर्चस्व की जंग में बिखरा विपक्ष, बालियान की गुगली पर आउट हुई भाकियू

Sat, 03 Jul 2021 11:51 PM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर

सार

विपक्ष के नेताओं में यह भय लगातार बना रहा कि कहीं दूसरी पार्टी इस चुनाव में अधिक लाभ न उठा ले। आंतरिक रूप से टांग खिंचाई होती रही और पूरा लाभ भाजपा को मिल गया।
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- फोटो : amar ujala
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विस्तार
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मुजफ्फरनगर जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में विपक्ष अंत तक बिखरा ही नजर आया। मंच पर एक साथ तो बैठे पर आंतरिक रूप से वर्चस्व की जंग चलती रही। भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने सतेंद्र बालियान को भाकियू की टोपी पहना कर चुनाव लड़ाने की घोषणा तो कर दी, लेकिन वह चुनाव को मैनेज नहीं कर पाए। विपक्ष की स्थिति अपनी ढपली अपना राग जैसी रही।

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जिला पंचायत चुनाव में इस बार विपक्ष मजबूत स्थिति में उभरा था। 43 जिला पंचायत सदस्यों में से भाजपा के केवल 13 सदस्य ही जीत पाए थे। भाजपा इन 13 के बल पर 30 पर पहुंच गई। विपक्ष जो 30 के समर्थन का दावा कर रहा था वह चार पर आकर सिमट गया। शुरूआत में भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने केंद्रीय राज्यमंत्री डॉक्टर संजीव बालियान के भाई सतेंद्र बालियान को विपक्ष में मिलाकर उन्हें भाकियू की टोपी पहनाई और चुनाव लड़ाने की घोषणा कर दी।

शुरूआत से ही चुनाव को जिस तरह से मैनेज किया जाना था वह नहीं किया गया। जिन मुस्लिम वोटों के सहारे सतेंद्र को चुनाव मैदान में उतारा गया वह एक-एक करके खिसकती चली गई। भाजपा पांच मुस्लिमों को अपने पाले में लाने में सफल हो गई। आजाद समाज पार्टी के छह सदस्य चुनाव जीते, विपक्ष के पास अंत तक इनमें से केवल दो ही रह पाए। बाकी भाजपा के साथ चले गए। चुनाव में विपक्ष के बड़े नेता वह भूमिका नहीं निभा सके जिसकी जरूरत थी।

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रालोद जिलाध्यक्ष अजीत राठी और उनकी टीम को छोड़कर वोटों की जोड़ तोड़ में विपक्ष का दूसरा कोई नेता नजर नहीं आया। सपा जिलाध्यक्ष प्रमोद त्यागी तो सतेंद्र को वोट नहीं देने का बयान पहले ही दे चुके थे। हालांकि वह बाद में सतेंद्र के साथ आ गए, लेकिन मतदान के दौरान जिस तरह चुनाव का बहिष्कार किया किया और नौ वोट नहीं डाले गए, इसमें भाकियू प्रत्याशी सतेंद्र को बड़ा नुकसान हुआ वह केवल चार वोट पर सिमट गए।

विपक्ष के नेताओं में यह भय लगातार बना रहा कि कहीं दूसरी पार्टी इस चुनाव में अधिक लाभ न उठा ले। आंतरिक रूप से टांग खिंचाई होती रही और पूरा लाभ भाजपा को मिल गया। कमाल की बात यह है कि भाकियू का विकास शर्मा के नाम पर जो एक मात्र वोट था वह भी सतेंद्र को नहीं मिल पाया, बहिष्कार करने वालों में वह भी शामिल रहे। अंत तक रालोद के अंकित बालियान और इरशाद ही सतेंद्र के पक्ष में खड़े नजर आए।

सतेंद्र को ये चार वोट मिले
भाकियू प्रत्याशी सतेंद्र बालियान को चार वोट मिली है, उनमें एक वोट उनकी खुद की है, दूसरी वोट उनके साथ वोट डालने पहुंची आरिफा की है। इसके अलावा रालोद के जिपं सदस्य अंकित बालियान और इरशाद ने उन्हें वोट दी। पूर्व मंत्री योगराज सिंह इन दोनों की वोट डलवाने के लिए खुद कचहरी तक पहुंचे।

इन नौ ने किया बहिष्कार
जिला पंचायत के चुनाव में जिन नौ जिपं सदस्य ने बहिष्कार कर वोट नहीं डाले इनमें तहसीन बानो, संजय रवि, विकास शर्मा, नूरजहां सलीम, यूनुस कसेरवा, शमीना, राफे खां, इमरान, अंजुम खान शामिल हैं।

26 को ही वोट न देना तय हो गया था
26 जून को जिपं के लिए नामांकन हुआ था। इससे पहले 25 में लगभग आठ मुस्लिम सदस्यों की एक मीटिंग हुई थी, जिसमें सतेंद्र बालियान को वोट नहीं देने की बात कही गई थी। इसी के चलते तहसीन बानो का नामांकन कराया गया था। बाद में तहसीन का पर्चा निरस्त हो गया। इन लोगों को कुछ न कुछ बहाना चाहिए था। सतेंद्र का वोट न डालकर वह अपनी बात पर कायम रहे।
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