रालोद जिलाध्यक्ष अजीत राठी और उनकी टीम को छोड़कर वोटों की जोड़ तोड़ में विपक्ष का दूसरा कोई नेता नजर नहीं आया। सपा जिलाध्यक्ष प्रमोद त्यागी तो सतेंद्र को वोट नहीं देने का बयान पहले ही दे चुके थे। हालांकि वह बाद में सतेंद्र के साथ आ गए, लेकिन मतदान के दौरान जिस तरह चुनाव का बहिष्कार किया किया और नौ वोट नहीं डाले गए, इसमें भाकियू प्रत्याशी सतेंद्र को बड़ा नुकसान हुआ वह केवल चार वोट पर सिमट गए।
विपक्ष के नेताओं में यह भय लगातार बना रहा कि कहीं दूसरी पार्टी इस चुनाव में अधिक लाभ न उठा ले। आंतरिक रूप से टांग खिंचाई होती रही और पूरा लाभ भाजपा को मिल गया। कमाल की बात यह है कि भाकियू का विकास शर्मा के नाम पर जो एक मात्र वोट था वह भी सतेंद्र को नहीं मिल पाया, बहिष्कार करने वालों में वह भी शामिल रहे। अंत तक रालोद के अंकित बालियान और इरशाद ही सतेंद्र के पक्ष में खड़े नजर आए।
सतेंद्र को ये चार वोट मिले
भाकियू प्रत्याशी सतेंद्र बालियान को चार वोट मिली है, उनमें एक वोट उनकी खुद की है, दूसरी वोट उनके साथ वोट डालने पहुंची आरिफा की है। इसके अलावा रालोद के जिपं सदस्य अंकित बालियान और इरशाद ने उन्हें वोट दी। पूर्व मंत्री योगराज सिंह इन दोनों की वोट डलवाने के लिए खुद कचहरी तक पहुंचे।
इन नौ ने किया बहिष्कार
जिला पंचायत के चुनाव में जिन नौ जिपं सदस्य ने बहिष्कार कर वोट नहीं डाले इनमें तहसीन बानो, संजय रवि, विकास शर्मा, नूरजहां सलीम, यूनुस कसेरवा, शमीना, राफे खां, इमरान, अंजुम खान शामिल हैं।
26 को ही वोट न देना तय हो गया था
26 जून को जिपं के लिए नामांकन हुआ था। इससे पहले 25 में लगभग आठ मुस्लिम सदस्यों की एक मीटिंग हुई थी, जिसमें सतेंद्र बालियान को वोट नहीं देने की बात कही गई थी। इसी के चलते तहसीन बानो का नामांकन कराया गया था। बाद में तहसीन का पर्चा निरस्त हो गया। इन लोगों को कुछ न कुछ बहाना चाहिए था। सतेंद्र का वोट न डालकर वह अपनी बात पर कायम रहे।