टेक्निकल कंपनी की दर्जनों ईटीआईएम और बसों में लगे वीटीएस काम नहीं कर रहे हैं। इसकी जांच कर कंपनी के भुगतान रोकने की तैयारी है। अक्टूबर में भी कंपनी के भुगतान में कटौती की जा चुकी है। लगातार उपकरणों में आ रही कमी पर कंपनी को एआरएम ने नसीहत दी है।
रोडवेज विभाग में चालकों के अंधाधुंध बस दौड़ाने की शिकायतों के मद्देनजर ट्राइमेक्स कंपनी से करार किया गया। ट्राइमेक्स ने बसों में वीटीएस (व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम) और परिचालकों के हाथ में ईटीआईएम (इलेक्ट्रॉनिक्स टिकट इश्यूइंग मशीन) दी। डिपो में 177 बसों में वीटीएस और करीब 223 ईटीआईएम मशीनें हैं। वीटीएस के माध्यम से बसों की स्पीड और चालकों की मनमानी पर ब्रेक लग गया, लेकिन दर्जनभर वीटीएस खराब पड़ी हैं। जिससे बसों को ट्रैस नहीं किया जा रहा है।
स्पीड पर भी कंट्रोल का पता नहीं लग पा रहा है। इसके अलावा भी ईटीआईएम में 223 में से 180 काम कर रही हैं। 43 ईटीआईएम बंद पड़ी हैं। इसके अलावा भी डिपो पर कंपनी को कई अन्य कार्य करने थे, मगर सुस्ती अपनाई हुई है। इस पर विभाग ने नाराजगी जताई है। उपकरणों में आ रही कमी को लेकर कंपनी को फटकार लगाई गई है। अक्टूबर में भी कंपनी के कई उपकरणों में दिक्कतें हुईं।
जिसके चलते कंपनी के भुगतान में एक लाख 16 हजार से अधिक रुपये की कटौती की गई। नवंबर माह की रिपोर्ट में जितने भी उपकरण खराब या काम करने की हालत में नहीं है। उनकी सूची तैयार की गई है। एआरएम बीपी अग्रवाल ने बताया कि ट्राइमेक्स कंपनी के माध्यम से डिपो पर तमाम बसों को हाईटेक किया गया है। इसका भुगतान होता है। ईटीआईएम और वीटीएस में खामियां मिली हैं। जांच के बाद कंपनी पर कार्रवाई की जाएगी।