जेल में गत माह बीमारी के चलते हुई पांच बंदियों की मौत के बाद भी शासन ने नए चिकित्सक की नियुक्ति नहीं की है। परेशान जेल अधिकारियों ने खुद ही सिस्टम से बंदियों के उपचार की नई योजना बनाई है। इसके लिए कारागार में 28 रजिस्टर रखवाए गए हैं। बंदी सुबह-शाम रजिस्टर में अपनी बीमारी को नोट करेंगे। इसके अलावा रोजाना नए आने वाले बंदियों की भी अपनी बीमारी गेट पर रखे रजिस्टर में नोट करवानी होगी। जेलर सुबह शाम रजिस्टर से बीमारी की जानकारी लेकर बंदी को सही उपचार दिलाएंगे।
जिला कारागार में नवंबर माह में पांच बंदियों का बीमारी के चलते अस्पतालों में निधन हो गया था। मात्र एक चिकित्सक के हाथों में हजारों बंदियों के स्वास्थ्य का जिम्मा है। ऐसे में जेल अधीक्षक ने शासन से कारागार में और चिकित्सक की तैनाती करने के लिए पत्र लिखा था। शासन की ओर से कोई नियुक्ति नहीं होने से जेल अधिकारियों ने खुद ही व्यवस्था को सही करने का जिम्मा लिया है। जेल अधीक्षक राकेश सिंह ने जेल की 26 बैरकों में और मेन गेट के पास दो रजिस्टर रखवाए हैं। बंदियों के स्वास्थ्य की जानकारी लेने के लिए कुल 28 रजिस्टर कारागार के भीतर रखे गए हैं।
जेलर राजेश सिंह सुबह-शाम इन रजिस्टरों को देखते हैं। बंदियों द्वारा रजिस्टर में दर्ज कराई गई बीमारी का चिकित्सक से तुरंत उपचार कराया जा रहा है। इसके अलावा जिले के सभी थानों और कोर्ट से आने वाले नए बंदियों को भी जेल में आते ही अपनी बीमारी गेट पर रखे रजिस्टर में दर्ज करानी होगी। जेल अधीक्षक राकेश सिंह ने बताया कि बनाई गई व्यवस्था से बंदियों को समय से उपचार मिल सकेगा। बीमारी को देखकर बंदी को बैरक में ही दवाई उपलब्ध करा दी जाएगी।